परीक्षा से पहले ‘टेलीग्राम’ पर पाबंदी बरकरार, दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकार का फैसला सही ठहराया !

परीक्षा से पहले ‘टेलीग्राम’ पर पाबंदी बरकरार, दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकार का फैसला सही ठहराया !

नई दिल्ली। देश में ‘नीट’ की दोबारा होने वाली परीक्षा तक टेलीग्राम सेवा पर रोक लागू रहेगी। दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार के इस प्रतिबंध के खिलाफ टेलीग्राम द्वारा दायर की गई अपील को सिरे से खारिज कर दिया है। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति तेजस कारिया ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार के पास सूचना प्रौद्योगिकी कानून की धारा 69ए के अंतर्गत किसी भी प्लेटफॉर्म पर पाबंदी लगाने का पूरा वैधानिक अधिकार है। न्यायालय ने यह भी रेखांकित किया कि इस संवेदनशील विषय पर समीक्षा समिति ने सरकारी निर्णय की गहनता से पड़ताल की है। शासन ने यह कदम पूरी समझदारी और सतर्कता के साथ उठाया है, जिसमें किसी भी प्रकार की जल्दबाजी अथवा लापरवाही नजर नहीं आती।

देश मे 15 करोड़ उपभोक्ताओं की दुहाई बेअसर
अदालती कार्यवाही के दौरान यह सवाल उठा था कि कुछ संदिग्ध परीक्षार्थियों की हरकतों के कारण देश के 15 करोड़ आम उपभोक्ताओं के अधिकारों को किस तरह बाधित किया जा सकता है। इसके जवाब में सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि आगामी परीक्षा से ठीक पहले इस प्लेटफॉर्म के गलत इस्तेमाल की आशंकाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सरकारी पक्ष ने अदालत के सामने 5 बेहद गंभीर तथ्य पेश किए।
सरकार ने बताया कि व्हाट्सएप पर जहां प्रति उपभोक्ता केवल एक बॉट की सीमा तय है, वहीं टेलीग्राम पर महज एक खाते से 40 बॉट तैयार किए जा सकते हैं। पूरी तरह क्लाउड आधारित प्रणाली होने के कारण इस पर अपराध को अंजाम देने वालों का सुराग खोजना बेहद जटिल हो जाता है। यदि इसे आंशिक रूप से ब्लॉक भी कर दिया जाए, तब भी जांच एजेंसियां वास्तविक अपराधी तक नहीं पहुंच पातीं। इसके अतिरिक्त, इस प्लेटफॉर्म पर किसी चैनल के 1 लाख सदस्यों को पलक झपकते ही दूसरे नए चैनल पर भेजा जा सकता है, जो सुरक्षा के लिहाज से बड़ा खतरा है। इसमें संदेशों की तारीख और समय को बदलने की सुविधा भी उपलब्ध है, जिसका दुरुपयोग पूर्व में हो चुका है। वर्ष 2024 में परीक्षा समाप्त होने के बाद प्रश्नपत्र जारी किया गया था, लेकिन उसकी तारीख को हेरफेर करके परीक्षा से एक दिन पहले का दिखा दिया गया था। इन्हीं वजहों से यह माध्यम साइबर अपराध, प्रश्नपत्र लीक, बाल अपराध, आतंकवाद को बढ़ावा देने और वित्तीय धोखाधड़ी का बड़ा जरिया बन चुका है।

टेलीग्राम की सफाई, 900 से अधिक कड़ियां हटाने का दावा
दूसरी तरफ, टेलीग्राम की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता ध्रुव मेहता ने स्वीकार किया कि पूर्व में हुई घटना से लाखों छात्र प्रभावित हुए हैं। परंतु उन्होंने यह तर्क भी रखा कि क्या किसी एक घटना को आधार बनाकर पूरे माध्यम को बंद करना तर्कसंगत है? कंपनी ने अदालत को सूचित किया कि 9 जून को प्रशासन से संदिग्ध कड़ियों (यूआरएल’एस) की जानकारी मिलते ही एक घंटे के भीतर आपत्तिजनक सामग्री को हटा दिया गया था। संस्था ने दावा किया कि उन्होंने नीट परीक्षा से जुड़ी अवैध सामग्री वाली 900 से अधिक कड़ियों को अपने तंत्र से साफ किया है। नियमों के उल्लंघन को पकड़ने के लिए वे लगातार कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों और मानवीय निगरानी का सहारा ले रहे हैं।

वैश्विक स्तर पर भी लग चुकी लगाम, देश में ठगी की शिकायतें
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर इस ऐप के माध्यम से होने वाली धोखाधड़ी के मामलों में भारी उछाल आया है। केवल वर्ष 2025 में ही इससे संबंधित 2.75 लाख से ज्यादा शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें करीब 3,086 करोड़ रुपए की आर्थिक धोखाधड़ी दर्ज की गई। इसके साथ ही सरकार ने वैश्विक उदाहरण देते हुए बताया कि स्थानीय कानूनों की अनदेखी, सामग्री की कमजोर निगरानी और जांच एजेंसियों का सहयोग न करने के कारण चीन, ईरान, फ्रांस, रूस, जर्मनी और ब्राजील जैसे तमाम देश भी इस ऐप के विरुद्ध दंडात्मक और विनियामक कदम उठा चुके हैं।

प्रश्नपत्र लीक होने के बाद दोबारा हो रही है परीक्षा
उल्लेखनीय है कि देश भर में 3 मई 2026 को नीट-यूजी परीक्षा का आयोजन किया गया था, जिसमें लगभग 23 लाख परीक्षार्थी शामिल हुए थे। परीक्षा संपन्न होने के तुरंत बाद कई प्रांतों से प्रश्नपत्र समय से पहले लीक होने और अनुचित साधनों के प्रयोग की शिकायतें आईं। जांच में बड़े पैमाने पर धांधली के प्रमाण मिलने के बाद परीक्षा नियामक संस्था (एनटीए) ने 12 मई को इस परीक्षा को पूरी तरह निरस्त कर दिया था। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों और सरकार के संयुक्त मूल्यांकन के आधार पर ही अब पुनः परीक्षा का आयोजन सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे पहले सुरक्षात्मक कदम के तहत 16 जून से 22 जून तक यह अस्थायी प्रतिबंध लगाया गया है।

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