इंदौर। उज्जैन में वर्ष 2028 में आयोजित होने वाले सिंहस्थ महापर्व की तैयारियों को लेकर पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल ने अधोसंरचना विस्तार की दिशा में काम तेज कर दिया है। सिंहस्थ के दौरान देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए रेलवे नेटवर्क को अधिक सक्षम बनाने की योजना पर कार्य किया जा रहा है।
अनुमान है कि आयोजन अवधि में करीब 300 विशेष और नियमित ट्रेनों का संचालन किया जा सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए इंदौर और आसपास के रेलवे स्टेशनों की क्षमता बढ़ाने की तैयारी शुरू हो गई है। रेलवे की योजना के अनुसार इंदौर और लक्ष्मीबाई नगर रेलवे स्टेशन के बीच तीसरी रेल लाइन बिछाई जाएगी। इस परियोजना पर जल्द काम शुरू होने की संभावना है।
ट्रेनों को अलग ट्रैक पर संचालन
नई लाइन बनने के बाद इंदौर की ओर से जाने वाली और लक्ष्मीबाई नगर की दिशा से आने वाली ट्रेनों को अलग ट्रैक पर संचालित किया जा सकेगा। इससे मुख्य लाइन पर दबाव कम होगा और ट्रेनों के आवागमन में आने वाली बाधाएं घटेंगी। रेलवे विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान व्यवस्था में कई बार ट्रेनों को क्रॉसिंग या मार्ग खाली होने का इंतजार करना पड़ता है, जिससे देरी होती है। तीसरी लाइन शुरू होने के बाद ट्रेनों की आवाजाही अधिक व्यवस्थित होगी और परिचालन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। एक ही समय में दो ट्रेनों के संचालन की सुविधा मिलने से यात्रियों को भी लाभ मिलेगा और समय की बचत होगी।
भीड़ कम और सुविधाएं बेहतर
सिंहस्थ के दौरान इंदौर रेलवे स्टेशन पर यात्रियों का दबाव काफी बढ़ने की संभावना है। इसे देखते हुए लक्ष्मीबाई नगर रेलवे स्टेशन को वैकल्पिक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। भविष्य में कई ट्रेनों का संचालन और टर्मिनेशन यहां से किया जा सकता है, जिससे इंदौर मुख्य स्टेशन पर भीड़ कम होगी और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी। रेलवे सूत्रों के अनुसार लक्ष्मीबाई नगर स्टेशन पर प्लेटफार्म, यात्री सुविधाओं, पार्किंग और परिचालन व्यवस्थाओं को मजबूत करने की दिशा में भी योजनाएं बनाई जा रही हैं। इससे यह स्टेशन केवल सहायक केंद्र ही नहीं, बल्कि इंदौर रेल नेटवर्क का महत्वपूर्ण संचालन केंद्र बन सकेगा।
ट्रेनों के संचालन में संतुलन
तीसरी लाइन के निर्माण से मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों के संचालन में भी संतुलन बनेगा। वर्तमान में एक ही ट्रैक पर अधिक दबाव होने के कारण कई बार ट्रेनों के समय में बदलाव करना पड़ता है। अतिरिक्त लाइन उपलब्ध होने से रेल यातायात अधिक सुचारू होगा और भविष्य में नई ट्रेनों के संचालन का मार्ग भी आसान बनेगा।
रेलवे अधिकारियों का मानना है कि सिंहस्थ-2028 केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि रेलवे अधोसंरचना को आधुनिक और विस्तारित करने का भी अवसर है। इसी उद्देश्य से इंदौर-लक्ष्मीबाई नगर रेलखंड को मजबूत बनाने के लिए तीसरी लाइन परियोजना को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि आने वाले वर्षों में बढ़ती यात्री संख्या और रेल यातायात की जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा किया जा सके।