हेट स्पीच मामला : असम के मुख्यमंत्री समेत कई दिग्गजों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका

हेट स्पीच मामला : असम के मुख्यमंत्री समेत कई दिग्गजों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका

 ​नई दिल्ली। संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों द्वारा कथित तौर पर नफरत फैलाने वाली बयानबाजी (हेट स्पीच) का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत की चौखट पर पहुंच गया है। दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग सहित 12 प्रतिष्ठित सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों ने सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की है। इस याचिका में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के एक विवादित ‘शूटिंग वीडियो’ और अन्य नेताओं के बयानों को आधार बनाया गया है।

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सामाजिक सौहार्द बिगड़ने की जताई चिंता याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि सत्ता में बैठे जिम्मेदार पदों के व्यक्ति जब किसी विशेष समुदाय को निशाना बनाकर टिप्पणियां करते हैं, तो इससे न केवल संवैधानिक मर्यादा का उल्लंघन होता है,

बल्कि समाज के ताने-बाने को भी अपूरणीय क्षति पहुंचती है। याचिका में नजीब जंग के अलावा सामाजिक कार्यकर्ता रूपरेखा वर्मा और जॉन दयाल जैसे प्रमुख चेहरे शामिल हैं, जिन्होंने इन बयानों को लोकतंत्र के लिए एक बड़ा खतरा बताया है।

​निशाने पर कई राज्यों के मुख्यमंत्री और बड़े नाम ​सुप्रीम कोर्ट को सौंपी गई इस याचिका में न केवल असम के मुख्यमंत्री, बल्कि अन्य राज्यों के प्रमुख नेताओं और मंत्रियों के बयानों का भी विस्तृत विवरण दिया गया है
​पुष्कर सिंह धामी (उत्तराखंड CM) : उनकी हालिया बयानबाजी को लेकर आपत्ति जताई गई है।


​योगी आदित्यनाथ (उत्तर प्रदेश CM) : विधानसभा सत्र के दौरान उनके कुछ शब्दों को विवादित माना गया है।
नितेश राणे (महाराष्ट्र के विधायक/नेता) : अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ कथित कठोर भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप है।
​अजीत डोभाल (NSA) : याचिका में युवाओं से ‘इतिहास का बदला’ लेने जैसे कथित आह्वान से जुड़े संदर्भों का भी जिक्र किया गया है।

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सख्त दिशा-निर्देशों की मांग
​याचिकाकर्ताओं की मुख्य मांग है कि जनप्रतिनिधियों और उच्च पदस्थ अधिकारियों के लिए सार्वजनिक भाषणों को लेकर स्पष्ट गाइडलाइन जारी की जाए। याचिका में कहा गया है कि राजनीतिक लाभ के लिए की जाने वाली ऐसी बयानबाजी देश के भाईचारे को कमजोर कर रही है। अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं कि क्या अदालत इस संवेदनशील मामले पर हस्तक्षेप करेगी और नेताओं की जुबान पर लगाम कसने के लिए कोई नया आदेश पारित करेगी।

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