हर दिन 27 लोगों की सड़क पर मौत!
भोपाल। प्रदेश की सड़कें अब लोगों के लिए सफर का जरिया कम और जानलेवा रास्ता ज्यादा बनती जा रही हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की वर्ष 2024 की रिपोर्ट ने प्रदेश की सड़क सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर तस्वीर सामने रख दी है। रिपोर्ट के अनुसार हिट एंड रन यानी टक्कर मारकर भाग जाने की घटनाओं में मध्यप्रदेश पूरे देश में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। केवल उत्तर प्रदेश ही इससे आगे है।
सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि एक ही वर्ष में ऐसे हादसों में 10 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में वर्ष 2024 के दौरान हिट एंड रन के 9 हजार 260 मामले दर्ज हुए, जिनमें 10 हजार 130 लोगों ने अपनी जान गंवाई। यानी प्रदेश में औसतन हर दिन 27 लोगों की मौत सड़क पर हुई। समय के हिसाब से देखें तो लगभग हर घंटे एक से ज्यादा व्यक्ति सड़क दुर्घटना का शिकार होकर जिंदगी हार रहा है।
सबसे खराब स्थिति
रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश में हिट एंड रन के 18 हजार 536 मामले सामने आए, जिनमें 19 हजार 641 लोगों की मौत हुई। इसके बाद मध्य प्रदेश का नाम सबसे ऊपर दर्ज हुआ। चौंकाने वाली बात यह भी है कि महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे बड़े राज्यों की तुलना में मध्यप्रदेश में ऐसे हादसे कहीं ज्यादा सामने आए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदेश में बढ़ती वाहन संख्या, तेज रफ्तार और नियमों की अनदेखी ने हालात को बेहद खतरनाक बना दिया है। खासकर राष्ट्रीय राजमार्गों और शहरों की मुख्य सड़कों पर वाहन चालक बिना किसी डर के तेज गति से वाहन चला रहे हैं।
लापरवाह वाहन चलाने के मामले
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि प्रदेश में तेज और लापरवाही से वाहन चलाने के 19 हजार 658 मामले दर्ज किए गए। इन घटनाओं में 20 हजार 653 लोग किसी न किसी रूप में हादसों का शिकार हुए। देशभर में ऐसे कुल 1 लाख 93 हजार मामलों में से करीब हर दसवां मामला मध्य प्रदेश से सामने आया है।
यातायात विशेषज्ञों के अनुसार वाहन चालकों में नियमों को लेकर गंभीरता की कमी लगातार बढ़ रही है। शहरों में लोग संकेतों की अनदेखी करते हैं, जबकि राजमार्गों पर गति सीमा का पालन नहीं होता। दोपहिया वाहन चालकों में सिर सुरक्षा कवच और चारपहिया चालकों में सुरक्षा पेटी के इस्तेमाल को लेकर भी लापरवाही साफ दिखाई देती है।
अन्य हादसों में भी भयावह स्थिति
हिट एंड रन के अलावा अन्य सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में भी प्रदेश की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार अन्य सड़क हादसों की श्रेणी में 4 हजार 682 मामले दर्ज हुए, जिनमें 5 हजार 310 लोगों की मौत हो गई। इससे साफ है कि सड़क सुरक्षा केवल एक श्रेणी की समस्या नहीं रह गई, बल्कि यह प्रदेशव्यापी संकट का रूप ले चुकी है।
ऐसे मामलों में भी प्रदेश आगे
रिपोर्ट के अनुसार दूसरों की जान जोखिम में डालकर घायल करने के 20 हजार 307 मामले भी दर्ज किए गए। इन घटनाओं में 22 हजार से अधिक लोग घायल या प्रभावित हुए। घायलों की संख्या के मामले में मध्यप्रदेश देश के सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में शामिल हो गया है। अस्पतालों में बढ़ते सड़क हादसा पीड़ितों का दबाव अब स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए भी चुनौती बनता जा रहा है। कई मामलों में समय पर उपचार नहीं मिलने के कारण घायल दम तोड़ देते हैं।