मां के नाम पर गाली दी तो लगेगा जुर्माना, पहली बार ₹1000, दूसरी बार ₹5000 रतलाम के पलसोड़ा गांव में महिलाओं के सम्मान के लिए पंचायत का बड़ा फैसला!

    बरतलाम। बदलते सामाजिक माहौल और बढ़ती अभद्र भाषा को रोकने के लिए रतलाम जिले की ग्राम पंचायत पलसोड़ा ने एक अनोखा और सख्त निर्णय लिया है। गांव में अब मां के नाम पर अपशब्द या गाली-गलौज करना महंगा पड़ेगा। पंचायत ने प्रस्ताव पारित कर तय किया है कि जो भी व्यक्ति ऐसी भाषा का इस्तेमाल करेगा, उस पर आर्थिक दंड लगाया जाएगा। बार-बार गलती करने वालों के खिलाफ सामाजिक स्तर पर भी कार्रवाई होगी।
      ग्राम पंचायत के इस फैसले को गांव में महिलाओं के सम्मान और नई पीढ़ी में अच्छे संस्कार विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पंचायत का कहना है कि घर और समाज में जिस भाषा का उपयोग होता है, उसका असर बच्चों और युवाओं के व्यवहार पर सीधा पड़ता है। इसी सोच के साथ यह पहल शुरू की गई है।

पहली गलती पर एक हजार, दूसरी बार पांच हजार का दंड
      पंचायत द्वारा पारित प्रस्ताव के अनुसार यदि कोई व्यक्ति पहली बार मां के नाम पर गाली देता पकड़ा जाता है तो उससे एक हजार रुपये का दंड लिया जाएगा। यदि वही व्यक्ति दोबारा ऐसी हरकत करता है तो उस पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
      इसके बाद भी यदि संबंधित व्यक्ति अपनी आदत नहीं बदलता और अभद्र भाषा का उपयोग करता है तो पंचायत सामाजिक बहिष्कार जैसी सख्त कार्रवाई भी कर सकती है। पंचायत के इस निर्णय को लेकर गांव में व्यापक चर्चा है और अधिकांश लोग इसे समाज सुधार की दिशा में जरूरी कदम बता रहे हैं।

महिलाओं के सम्मान के लिए लिया गया निर्णय
     ग्राम पंचायत की सरपंच रेखाबाई मईडा ने बताया कि गांव में महिलाओं के सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के उद्देश्य से यह प्रस्ताव पारित किया गया है। उनका कहना है कि अक्सर रोजमर्रा की बातचीत में मां और बहनों के नाम पर गालियां देना सामान्य बात समझ ली जाती है, जबकि यह महिलाओं के सम्मान के खिलाफ है।
     पंचायत का मानना है कि भाषा में सुधार आने से सामाजिक माहौल भी बेहतर होगा। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि यदि बच्चों को शुरू से ही मर्यादित भाषा सिखाई जाए तो आगे चलकर समाज में अपराध और हिंसा जैसी घटनाओं में भी कमी लाई जा सकती है।

बैठक में लिया गया सामूहिक संकल्प
     शनिवार सुबह आयोजित पंचायत बैठक में सरपंच रेखाबाई मईडा, उप सरपंच श्यामलाल व्यास और पंचायत के अन्य सदस्यों ने इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूरी दी। बैठक में गांव के कई वरिष्ठ नागरिक और युवा भी मौजूद रहे। बैठक के दौरान यह संकल्प भी लिया गया कि केवल दंड लगाने तक सीमित न रहकर गांव में जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा। पंचायत गांव में मुनादी कराकर लोगों को इस निर्णय की जानकारी देगी। इसके अलावा सार्वजनिक स्थानों पर सूचना पत्र लगाए जाएंगे और सामाजिक तथा धार्मिक आयोजनों में भी लोगों को शालीन भाषा के उपयोग के लिए प्रेरित किया जाएगा।

गांव की महिलाओं और युवाओं ने किया स्वागत
      पंचायत के इस निर्णय का गांव की महिलाओं ने खुलकर समर्थन किया है। महिलाओं का कहना है कि अक्सर अपमानजनक भाषा सुनना सामान्य बात बन गई थी, लेकिन अब पंचायत के फैसले से माहौल बदलने की उम्मीद जगी है। युवाओं ने भी इस पहल को सकारात्मक बताया है। उनका कहना है कि यदि बचपन से ही अच्छी भाषा और संस्कार की सीख मिलेगी तो आने वाली पीढ़ी अधिक सभ्य और संवेदनशील बनेगी। ग्रामीणों का मानना है कि इस फैसले से महिलाओं और बालिकाओं के प्रति सम्मान बढ़ेगा और समाज में बेहतर वातावरण तैयार होगा।

बुरहानपुर के बोरसर गांव में भी लागू है अनोखी सजा
     बुरहानपुर जिले का बोरसर गांव भी इसी तरह के नियम को लेकर पहले चर्चा में आ चुका है। वहां यदि कोई व्यक्ति मां के नाम पर गाली देता है तो उसे पांच सौ रुपये का दंड भरना पड़ता है। साथ ही एक घंटे तक झाड़ू लगाने की सजा भी दी जाती है।
     अब रतलाम के पलसोड़ा गांव ने भी इसी दिशा में कदम बढ़ाया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समाज में भाषा सुधरेगी तो आपसी रिश्तों में सम्मान और अपनापन भी बढ़ेगा। पंचायत की इस पहल की आसपास के क्षेत्रों में भी चर्चा हो रही है और लोग इसे समाज सुधार का नया प्रयास मान रहे हैं।

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