भारत में जल्द दिखाई दे सकते हैं प्लास्टिक के नोट, रिजर्व बैंक की नई तैयारी!

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक देश में करेंसी नोटों की बढ़ती मांग और हर वर्ष नए नोट छापने पर होने वाले भारी खर्च को कम करने के लिए बड़े बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रहा है। केंद्रीय बैंक अब पारंपरिक कागजी नोटों की जगह अत्यधिक टिकाऊ और लंबे समय तक चलने वाले प्लास्टिक यानी पॉलीमर नोटों को लाने पर गंभीरता से विचार कर रहा है।
सूत्रों के अनुसार हाल ही में पटना और मुंबई में आयोजित रिजर्व बैंक की केंद्रीय बोर्ड की उच्च स्तरीय बैठकों में इस प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा हुई है। माना जा रहा है कि आम लोगों के बीच प्लास्टिक नोटों के उपयोग को परखने के लिए जल्द ही एक पायलट परियोजना शुरू की जा सकती है। यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो आने वाले समय में देश में बड़े स्तर पर पॉलीमर नोट चलन में लाए जा सकते हैं।

कागज के नोट जल्दी गंदे
रिजर्व बैंक के इस कदम के पीछे सबसे बड़ा कारण कागजी नोटों की सीमित उपयोग अवधि और उन्हें बार-बार बदलने में आने वाला खर्च बताया जा रहा है। वर्तमान में कागज से बने नोट जल्दी फट जाते हैं, गंदे हो जाते हैं और पानी या नमी के संपर्क में आने पर खराब होने लगते हैं। इसके कारण हर वर्ष बड़ी संख्या में पुराने नोटों को नष्ट करना पड़ता है और उनकी जगह नए नोट छापने पड़ते हैं। यह पूरी प्रक्रिया सरकार और रिजर्व बैंक पर बड़ा आर्थिक बोझ डालती है।

दुनिया के कई देशों में ऐसे नोट
पॉलीमर नोटों को अधिक मजबूत और टिकाऊ माना जाता है। ये नोट सामान्य कागजी नोटों की तुलना में कई गुना अधिक समय तक उपयोग में रह सकते हैं। यही वजह है कि दुनिया के कई देशों में पहले से ही प्लास्टिक नोटों का इस्तेमाल किया जा रहा है। रिजर्व बैंक का मानना है कि लंबे समय में इन नोटों से छपाई और रखरखाव पर होने वाले खर्च में बड़ी बचत संभव हो सकती है। सूत्रों के मुताबिक रिजर्व बैंक के आंतरिक स्तर पर तैयार किए गए आकलन में यह बात सामने आई है कि शुरुआती लागत अधिक होने के बावजूद लंबे समय में पॉलीमर नोट कागजी नोटों की तुलना में अधिक किफायती साबित हो सकते हैं।

एटीएम और बैंकिंग प्रणाली बदलेगी
इस योजना को लागू करने के लिए बैंकिंग ढांचे और एटीएम मशीनों को भी तैयार किया जाएगा। पिछले एक दशक में देश में तकनीकी ढांचे में तेजी से सुधार हुआ है और अब रिजर्व बैंक चाहता है कि नए नोटों को जारी करने से पहले एटीएम मशीनों और बैंकिंग प्रणाली को आवश्यक रूप से उन्नत किया जाए। इससे नए प्लास्टिक नोटों को मशीनों द्वारा आसानी से स्वीकार और वितरित किया जा सकेगा। बताया जा रहा है कि पायलट परियोजना के दौरान सीमित क्षेत्रों में इन नोटों का उपयोग शुरू किया जा सकता है। इसके बाद लोगों की प्रतिक्रिया, नोटों की उपयोगिता और तकनीकी व्यवस्थाओं का परीक्षण किया जाएगा। रिजर्व बैंक इस पूरी प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की तैयारी में है।

नोटों की उम्र में इजाफा होगा
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना सफल होती है तो इससे नोटों की उम्र बढ़ेगी, छपाई का खर्च कम होगा और खराब नोटों को नष्ट करने की प्रक्रिया पर होने वाला अतिरिक्त बोझ भी घटेगा। इसके साथ ही आम लोगों को भी लंबे समय तक साफ और सुरक्षित नोट इस्तेमाल करने की सुविधा मिल सकेगी। हालांकि रिजर्व बैंक की ओर से अभी तक प्लास्टिक नोटों को लेकर कोई अंतिम घोषणा नहीं की गई है, लेकिन केंद्रीय बोर्ड स्तर पर हुई चर्चाओं और पायलट परियोजना की तैयारी ने यह संकेत जरूर दे दिए हैं कि आने वाले वर्षों में भारतीय करेंसी का स्वरूप बदल सकता है।

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