दिल्ली के होटल में आग के बाद इंदौर प्रशासन की नींद खुली, 1500 होटलों, भोजनालयों का ब्यौरा नहीं!

दिल्ली के होटल में आग के बाद इंदौर प्रशासन की नींद खुली, 1500 होटलों, भोजनालयों का ब्यौरा नहीं!

इंदौर। दिल्ली के मालवीय नगर स्थित एक होटल में आग लगने से 21 लोगों की मौत के बाद देशभर में अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इंदौर में भी स्थिति पूरी तरह संतोषजनक नहीं मानी जा सकती। शहर में सैकड़ों छोटे-बड़े होटल और 1500 से अधिक भोजनालय संचालित हो रहे हैं, लेकिन इनमें से बड़ी संख्या के संबंध में प्रशासन के पास समग्र जानकारी उपलब्ध नहीं है।
दिल्ली की घटना के बाद नगर निगम ने एक बार फिर उन होटलों और इमारतों की जांच शुरू की है, जहां आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। हालांकि इससे पहले भी कई बार ऐसे अभियान चलाए गए, लेकिन वे कुछ समय बाद ठंडे पड़ गए। अब दिल्ली हादसे के बाद प्रशासन ने फिर से पड़ताल तेज करने का निर्णय लिया है।

अनुमति पत्र की अनिवार्यता
मध्यप्रदेश में अग्नि सुरक्षा संबंधी कानून पूरी तरह लागू नहीं होने के कारण 50 बिस्तरों से कम क्षमता वाले होटलों को अग्नि सुरक्षा अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने की बाध्यता नहीं है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में छोटे होटल और आवासीय प्रतिष्ठान बिना किसी औपचारिक निगरानी के संचालित हो रहे हैं। नगर निगम के अग्नि सुरक्षा अधिकारी विनोद मिश्रा के अनुसार ऐसे होटलों का कोई रिकॉर्ड उनके विभाग के पास उपलब्ध नहीं है, क्योंकि वे अनापत्ति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन ही नहीं करते।

10 हजार ऊंची इमारत, जांच 452 की
शहर में तीन मंजिल से अधिक ऊंचाई वाली 10 हजार से ज्यादा इमारतें हैं। इनमें करीब एक हजार भवन घनी आबादी और व्यस्त क्षेत्रों में स्थित हैं, जहां किसी भी आपात स्थिति में राहत और बचाव कार्य करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इन सभी इमारतों की जांच का लक्ष्य तय किया गया था, लेकिन पिछले दो महीनों में केवल 452 भवनों का ही निरीक्षण किया जा सका है। इससे स्पष्ट है कि अभी बड़ी संख्या में इमारतों की जांच बाकी है।

32 भवन सील, इनमें 7 होटल
नगर निगम ने हाल के अभियान में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करने वाले 32 भवनों को सील किया है। इनमें 7 होटल भी शामिल हैं। जांच के दौरान कई स्थानों पर अग्निशमन के बुनियादी साधन तक नहीं मिले। कई व्यावसायिक प्रतिष्ठान और होटल बिना पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्थाओं के संचालित पाए गए। नगर निगम के अपर आयुक्त आशीष पाठक ने कहा कि तीन मंजिल से अधिक ऊंचाई वाली सभी इमारतों की नियमित जांच की जा रही है। विशेष रूप से होटलों और अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाओं का परीक्षण किया जा रहा है। जिन भवनों में आवश्यक इंतजाम नहीं पाए जा रहे हैं, उनके विरुद्ध सील करने जैसी कार्रवाई भी की जा रही है। दिल्ली की घटना के बाद अब इंदौर में भी अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासनिक सतर्कता बढ़ गई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि स्थायी सुधार के लिए नियमित निगरानी और व्यापक रिकॉर्ड तैयार करना जरूरी होगा।

सर्वे में चौंकाने वाली स्थिति
जिन सात होटलों को सील किया गया, वहां अग्नि सुरक्षा की मूलभूत व्यवस्था भी नहीं थीं। सबसे गंभीर तथ्य यह रहा कि इन प्रतिष्ठानों की जानकारी भी निगम के अभिलेखों में व्यवस्थित रूप से दर्ज नहीं थी। सर्वे के बाद ही प्रशासन को उनकी वास्तविक स्थिति का पता चल सका। अधिकारियों का कहना है कि भले ही सभी होटलों के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य न हो, लेकिन अग्नि सुरक्षा उपकरण रखना और सुरक्षा परीक्षण कराना सभी के लिए आवश्यक है।

छोटे होटलों का पूरा रिकॉर्ड नहीं
इंदौर में करीब 250 से 300 छोटे-बड़े होटल तथा 1500 से अधिक भोजनालय संचालित हैं। बड़े होटलों की निगरानी अपेक्षाकृत आसान है, क्योंकि वे अनापत्ति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करते हैं। इसके विपरीत छोटे होटल और आवासीय प्रतिष्ठानों की संख्या, क्षमता और सुरक्षा इंतजामों का कोई समग्र रिकॉर्ड प्रशासन के पास उपलब्ध नहीं है। ऐसे में किसी दुर्घटना की स्थिति में राहत और बचाव कार्यों के दौरान अतिरिक्त कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

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