ग्रामीणों ने मंच पर भाजपा विधायक ओमप्रकाश सकलेचा को घेरा, उन्हें बीच में ही छोड़ना पड़ा कार्यक्रम !

नीमच। की जावद विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के विधायक और पूर्व मंत्री ओमप्रकाश सकलेचा को रविवार दोपहर उस समय बेहद असहज स्थिति का सामना करना पड़ा, जब ग्रामीण इलाकों के लोगों ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया। बांगरेड गांव में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान जनता का गुस्सा इस कदर फूटा कि विधायक को अपना संबोधन बीच में ही रोककर वहां से रवाना होना पड़ा। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान आक्रोशित ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधि के लिए बेहद तल्ख शब्दों का इस्तेमाल किया और सुरक्षाकर्मियों के साथ उनकी तीखी नोकझोंक भी हुई।

विधायक ने विकास गिनाए तो ग्रामीण भड़के
विधायक सकलेचा रविवार को बांगरेड गांव में एक नए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (अस्पताल) की आधारशिला रखने के लिए मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे थे। जैसे ही उन्होंने मंच संभाला और क्षेत्र में हुए विकास कार्यों को गिनाना शुरू किया, वहां मौजूद ग्रामीण भड़क उठे। ग्रामीणों की नाराजगी इस बात को लेकर थी कि सरकार अस्पताल की नई इमारत को तो मंजूरी दे रही है, लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए अब तक कोई पक्की सड़क नहीं बनाई गई है। भीड़ के बीच से लोगों ने सीधे विधायक पर सवालों की बौछार कर दी। लोगों ने पूछा कि जब अस्पताल तक आने का रास्ता ही कच्चा और कीचड़ से भरा है, तो मरीज वहां तक कैसे पहुंचेगा? क्या तड़पते हुए मरीज को इस बदहाल रास्ते से होकर आना पड़ेगा?

उग्र भीड़ ने मंच को चारों तरफ से घेरा
जब इन तीखे सवालों का कोई ठोस जवाब नहीं मिला, तो माहौल पूरी तरह से गर्मा गया। उग्र भीड़ ने मंच को चारों तरफ से घेर लिया और विधायक के विरोध में नारेबाजी शुरू कर दी। देखते ही देखते स्थिति नियंत्रण से बाहर होने लगी। इस दौरान सामने आए एक वीडियो में लोग चिल्ला-चिल्लाकर अपनी शिकायतें दर्ज कराते दिख रहे हैं। एक स्थानीय युवक ने गुस्से में कहा कि 5 साल बीत जाने के बाद भी यह जनप्रतिनिधि एक रास्ता तक नहीं बनवा पाए हैं और हर बार गाड़ी में बैठकर निकल जाते हैं। वहीं, कुछ लोग विधायक को पकड़कर उस बदहाल रास्ते पर ले जाने की जिद करते दिखे।

ग्रामीण विधायक पर ज्यादा उग्र हुए
जनता का गुस्सा इस बात को लेकर भी चरम पर था कि नेता सिर्फ चुनाव के समय ही उनके बीच आते हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वोट मांगने के वक्त तो नेता चक्कर काटते हैं, लेकिन जब काम की बात की जाए तो वे दूरी बना लेते हैं। जब विधायक और उनके सुरक्षाकर्मियों ने बिगड़ते माहौल को संभालने और वहां से सुरक्षित निकलने की कोशिश की, तो ग्रामीण और ज्यादा उग्र हो गए। इस खींचतान के बीच दोनों पक्षों में जमकर धक्का-मुक्की, तीखी बहस और नोकझोंक हुई, जिसके बाद विधायक को बैरंग ही लौटना पड़ा।

Leave a Comment