भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन अब केंद्र सरकार में नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी सीईओ की कमान संभालेंगे। अपने बेहतरीन प्रशासनिक कौशल, नीतिगत समझ और शानदार ट्रैक रिकॉर्ड के बल पर 1989 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अनुराग जैन को देश के इस शीर्ष नीति नियामक थिंक-टैंक का प्रमुख नियुक्त किया गया है। वहीं 1991 बैच के आईएएस अधिकारी अशोक बर्णवाल को मध्य प्रदेश का नया मुख्य सचिव नियुक्त किया गया है।
मध्य प्रदेश कैडर के वरिष्ठ अधिकारी अनुराग जैन केंद्र में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव, उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग के सचिव और प्रधानमंत्री कार्यालय में संयुक्त सचिव जैसे कई अहम पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। देश की महत्वाकांक्षी ‘जनधन योजना’ की रूपरेखा तैयार करने में भी उनकी मुख्य भूमिका रही है। बुनियादी ढांचे, औद्योगिक विकास, लॉजिस्टिक्स और प्रशासनिक सुधारों में उनके उत्कृष्ट कार्यों को देखते हुए केंद्र ने उन्हें यह बड़ी जिम्मेदारी दी है। वे 31 अगस्त 2025 को मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव पद से सेवानिवृत्त होने वाले थे, लेकिन केंद्र सरकार ने उनकी सेवाओं को 1 वर्ष के लिए बढ़ा दिया था। बीते कुछ समय से यह चर्चा जोरों पर थी कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पसंद के चलते उन्हें नीति आयोग या पीएमओ में कोई महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा जा सकता है।
आदेश से ठीक पहले चाय पर चर्चा
इस प्रशासनिक बदलाव में एक दिलचस्प संयोग भी देखने को मिला। अनुराग जैन को नीति आयोग का सीईओ बनाए जाने का आधिकारिक आदेश सामने आने से ठीक पहले उन्होंने एक खास टी पार्टी का आयोजन किया। इसमें राज्य सरकार के सभी अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव और विभागाध्यक्षों को बुलाया गया था। माना जा रहा है कि उन्हें नई जिम्मेदारी की जानकारी पहले ही मिल चुकी थी। यह आयोजन नए पदोन्नति नियमों के त्वरित क्रियान्वयन और यूसीसी बिल समेत अन्य सरकारी कार्यों के सफलतापूर्वक पूरा होने की खुशी में रखा गया था।
बेदाग छवि और तकनीकी दक्षता ने दिलाई बर्णवाल को कुर्सी
राज्य के नए मुख्य सचिव के रूप में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने अशोक बर्णवाल के नाम पर मुहर लगाई है। वे जनवरी 2027 में सेवानिवृत्त होंगे। 1991 बैच के अधिकारी बर्णवाल, अनुराग जैन के काफी करीबी और भरोसेमंद माने जाते हैं। सूत्रों के अनुसार जैन की अनुशंसा भी इस चयन का एक बड़ा कारण रही। बर्णवाल के पास स्वास्थ्य, वन, पर्यावरण, कृषि, पिछड़ा वर्ग कल्याण और सामान्य प्रशासन जैसे जटिल विभागों को संभालने का 35 वर्षों का विस्तृत अनुभव है।
वे तकनीकी और प्रबंधकीय योग्यता में भी निपुण
बीटेक माइनिंग इंजीनियरिंग के साथ-साथ उन्होंने पब्लिक पॉलिसी एंड मैनेजमेंट में उच्च शिक्षा प्राप्त की है। उनकी यही पृष्ठभूमि पेचीदा नीतिगत मुद्दों को रणनीतिक और तकनीकी नजरिए से हल करने में सहायक सिद्ध होती है। जनहित को प्राथमिकता देने वाली कार्यशैली के कारण वे वर्तमान में अपर मुख्य सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। स्वास्थ्य ढांचे के आधुनिकीकरण, खाद्य सुरक्षा और भोपाल गैस त्रासदी राहत कार्यों जैसे संवेदनशील मामलों में उनके शानदार प्रदर्शन को देखते हुए सरकार ने उन्हें राज्य की कमान सौंपी है।
दो मुख्यमंत्रियों के प्रमुख सचिव का अनुभव
अशोक बर्णवाल की साख का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि वे प्रदेश के दो अलग-अलग दलों के मुख्यमंत्रियों के प्रमुख सचिव रह चुके हैं। अगस्त 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें अपना प्रमुख सचिव नियुक्त किया था। इसके बाद 2018 में जब कमल नाथ के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार बनी, तब भी वे इस महत्वपूर्ण पद पर बने रहे।
प्रशासनिक परंपरा के तहत डॉ राजौरा की वल्लभ भवन से रवानगी
अनुराग जैन के बाद राज्य के सबसे वरिष्ठ अधिकारी 1990 बैच के अपर मुख्य सचिव जल संसाधन डॉ राजेश कुमार राजौरा हैं। चूंकि नए मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल उनसे जूनियर 1991 बैच के अधिकारी हैं, इसलिए पुरानी प्रशासनिक परंपरा के अनुसार डॉ राजौरा की मंत्रालय यानी वल्लभ भवन से अन्यत्र नियुक्ति की जाएगी। मध्य प्रदेश प्रशासन में हमेशा से यह परिपाटी रही है कि मुख्य सचिव से वरिष्ठ अधिकारियों को मंत्रालय से बाहर पदस्थ किया जाता है ताकि मुख्य सचिव को काम करने में किसी प्रकार की असहजता न हो।