इंदौर। राजा रघुवंशी हत्याकांड की मुख्य आरोपी सोनम की जमानत को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने सोनम के वकील को सुझाव दिया कि वह आत्मसमर्पण कर जांच में सहयोग करे। मामले में अगली सुनवाई आज 23 जुलाई को होगी, जहां यह तय किया जाएगा कि सोनम की जमानत जारी रहेगी या उसे फिर जेल भेजा जाएगा।
जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने सुनवाई में सोनम के वकील के सामने दो विकल्प रखे। पहला, यदि वे चाहें तो कोर्ट मेघालय सरकार की जमानत रद्द करने वाली अपील पर उनकी दलील सुनकर अंतिम आदेश पारित कर सकती है। दूसरा, सोनम आत्मसमर्पण कर दे, ताकि जांच एजेंसियां उससे पूछताछ कर सकें। इसी दौरान जमानत के मुद्दे पर भी विचार किया जा सके।
हाईकोर्ट से मिली थी जमानत
इस वर्ष 23 अप्रैल को मेघालय हाईकोर्ट ने सोनम को जमानत दी थी। इसके बाद मेघालय सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की, जिस पर अब सुनवाई चल रही है। सुप्रीम कोर्ट ने सोनम की ओर से गिरफ्तारी को लेकर उठाए सवालों पर भी टिप्पणी की। कोर्ट ने पूछा कि यदि गिरफ्तारी के समय कारण नहीं बताए गए थे तो यह मुद्दा पहले क्यों नहीं उठाया। इस पर सोनम के वकील ने कोर्ट से समय मांगते हुए कहा कि वे निर्देश लेकर गुरुवार तक अपना जवाब दाखिल करेंगे।
मेघालय सरकार का विरोध
मेघालय सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सोनम की जमानत का विरोध करते हुए कहा कि उसने पुलिस के सामने पेश होकर आत्मसमर्पण किया था। ऐसे में यह दावा करना कि गिरफ्तारी के कारण नहीं बताए गए, कानूनी रूप से स्वीकार्य नहीं माना जा सकता। उन्होंने बताया कि यदि गिरफ्तारी मेमो में कोई कमी है तो वह केवल लिपिकीय त्रुटि है। जो व्यक्ति स्वेच्छा से पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करता है, वह बाद में गिरफ्तारी की तकनीकी प्रक्रिया को आधार बनाकर राहत की मांग नहीं कर सकता।
कारण बताना जरूरी नहीं
तुषार मेहता ने दलील दी कि कानून के तहत कुछ परिस्थितियों में गिरफ्तारी के कारण अलग से बताने की आवश्यकता नहीं होती। यदि कोई व्यक्ति रंगेहाथ पकड़ा जाता है या स्वयं पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करता है तो बाद में यह तर्क नहीं दिया जा सकता कि उसे गिरफ्तारी का कारण नहीं बताया गया।