लोकायुक्त छापे के बाद नगर निगम के एआरओ जितेंद्र पांडे निलंबित, मप्र सिविल सेवा नियमों के तहत कार्रवाई!

लोकायुक्त छापे के बाद नगर निगम के एआरओ जितेंद्र पांडे निलंबित, मप्र सिविल सेवा नियमों के तहत कार्रवाई!


इंदौर। नगर निगम के सहायक राजस्व अधिकारी जितेंद्र पांडे को लोकायुक्त द्वारा की गई कार्रवाई के बाद निलंबित कर दिया गया है। नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने 14 अगस्त 2026 को निलंबन आदेश जारी करते हुए यह कार्रवाई मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के नियम 9 के तहत की।
जितेंद्र पांडे नगर निगम में सहायक राजस्व अधिकारी के पद पर कार्यरत थे, जबकि उनका मूल पद दरोगा है। लोकायुक्त द्वारा उनके विरुद्ध की गई कार्रवाई को गंभीरता से लेते हुए निगम प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से निलंबन की कार्रवाई की है। निलंबन आदेश में लोकायुक्त की कार्रवाई को आधार बनाया गया है। प्रशासनिक स्तर पर मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित अधिकारी के विरुद्ध सेवा नियमों के तहत कार्रवाई की गई। निलंबन के बाद मामले में आगे की विभागीय प्रक्रिया भी नियमानुसार जारी रहेगी।

216% ज्यादा वित्तीय खर्च

लोकायुक्त की छानबीन में यह तथ्य सामने आया कि अपने 31 साल के पूरे करियर में जितेंद्र पांडेय को वेतन के रूप में कुल मिलाकर करीब 80 लाख रुपये की वैध आय प्राप्त हुई थी। इसके विपरीत, उनके और उनके आश्रितों द्वारा किया गया अनुमानित खर्च तथा निर्मित परिसंपत्तियां 2.53 करोड़ रुपये से अधिक पाई गईं। इस प्रकार पांडेय का कुल वित्तीय व्यय उनकी वैध कमाई से 1.73 करोड़ रुपये अधिक पाया गया। लोकायुक्त जांच एजेंसियों के अनुसार, यह आंकड़ा उनकी तय कानूनी आय से लगभग 216.35 प्रतिशत अधिक अनुपातहीन संपत्ति का मामला दर्शाता है।

पत्नी के नाम दो इमारत
छापेमारी की प्रक्रिया में आरोपी अधिकारी की पत्नी भावना पांडेय के नाम दर्ज 2 बड़े भवनों के दस्तावेज बरामद हुए हैं। इनमें पहला निर्माण आनंद नगर एक्सटेंशन इलाके में स्थित जी+3 (चार मंजिला) भवन है, जबकि दूसरा निर्माण गजाधर नगर, चितावद क्षेत्र में स्थित जी+2 (तीन मंजिला) भवन है। प्रारंभिक आकलन के मुताबिक, इन दोनों भव्य इमारतों के निर्माण पर करीब 2.11 करोड़ रुपए से अधिक की राशि खर्च की गई थी। इसके अतिरिक्त परिवार के सदस्यों के नाम पंजीकृत लग्जरी गाड़ियों और अन्य घरेलू संपत्तियों के कागजात भी जांच दल के हाथ लगे हैं। लोकायुक्त की टीम फिलहाल जब्त किए गए सभी वित्तीय दस्तावेजों, निवेश विवरणों और बैंक खातों की सूक्ष्म जांच कर रही है।

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