नई दिल्ली। करोड़ों रुपये की आर्थिक धोखाधड़ी के मामले में लंबे समय से फरार चल रही आरोपी विशाखा राठौड़ को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से भारत ले आई है। विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय के समन्वय से यह प्रत्यर्पण प्रक्रिया पूरी की गई। सीबीआई इसे आर्थिक अपराध के मामले में महत्वपूर्ण सफलता मान रही है।
सीबीआई के अनुसार, विशाखा राठौड़ पर अपने सहयोगियों के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रचने का आरोप है। जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने निवेशकों को हर महीने निश्चित और गारंटीड रिटर्न का भरोसा देकर विभिन्न निवेश योजनाओं में धन लगाने के लिए प्रेरित किया। बड़ी संख्या में लोगों से रकम जुटाने के बाद उस धन का गबन कर लिया गया।
इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया
जांच एजेंसी के मुताबिक, निवेशकों से प्राप्त राशि को छिपाने के उद्देश्य से अलग-अलग बैंक खातों और डीमैट खातों के माध्यम से इधर-उधर स्थानांतरित किया गया, ताकि धन के वास्तविक स्रोत और उसके उपयोग का पता लगाना कठिन हो सके। आरोपी की गिरफ्तारी के लिए सीबीआई ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रयास किए थे। इस सिलसिले में इंटरपोल के माध्यम से विशाखा राठौड़ के खिलाफ रेड नोटिस जारी कराया गया। इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात की संबंधित एजेंसियों ने उसे हिरासत में लिया और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद भारत को सौंप दिया गया।
पूछताछ से धोखाधड़ी नेटवर्क की परतें खुलेगी
सीबीआई का कहना है कि विशाखा राठौड़ से पूछताछ के आधार पर पूरे आर्थिक धोखाधड़ी नेटवर्क की परतें खोली जाएंगी। साथ ही इस मामले में शामिल अन्य आरोपियों की भूमिका, धन के लेन-देन की श्रृंखला और निवेशकों की रकम के प्रवाह की भी विस्तार से जांच की जाएगी। एजेंसी ने मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। हालांकि, अब तक सीबीआई या किसी अन्य आधिकारिक एजेंसी ने यह सार्वजनिक नहीं किया है कि विशाखा राठौड़ किस कंपनी की निदेशक थीं, उनका व्यवसाय क्या था अथवा उनकी व्यक्तिगत पृष्ठभूमि क्या रही है। फिलहाल जांच एजेंसियां मामले से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल में जुटी हुई हैं।