भोजशाला पर हाई कोर्ट के फैसले से मुस्लिम पक्ष नाराज

कमाल मौला मस्जिद कमेटी बोली ‘सुप्रीम कोर्ट में पूरी मजबूती से लड़ेंगे कानूनी लड़ा

 इंदौर। धार स्थित भोजशाला मंदिर और कमाल मौला मस्जिद विवाद में उच्च न्यायालय के फैसले के बाद मुस्लिम पक्ष ने नाराजगी जताई है। अदालत ने शुक्रवार को अपने निर्णय में विवादित स्थल को मंदिर मानते हुए हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार दिया। फैसले के बाद कमाल मौला मस्जिद नमाज इंतजामिया कमेटी के अध्यक्ष जुल्फिकार पठान ने कहा कि वे इस निर्णय से संतुष्ट नहीं हैं और अब सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।

फैसले का सम्मान, लेकिन कई त्रुटियां मौजूद
    जुल्फिकार पठान ने कहा कि अभी पूरे फैसले का विस्तार से अध्ययन किया जा रहा है। उनके मुताबिक आदेश में कई ऐसी बातें हैं, जिन पर कानूनी आपत्ति दर्ज की जाएगी। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय के फैसले का सम्मान किया जाता है, लेकिन मुस्लिम पक्ष इससे सहमत नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की ओर से प्रस्तुत तथ्यों में कई कमियां और त्रुटियां हैं। पठान ने कहा कि उनके अधिवक्ता पूरे मामले की समीक्षा कर रहे हैं और जल्द ही सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी जाएगी।

मुस्लिम समाज से संयम रखने की अपील
   समाज को संदेश देते हुए जुल्फिकार पठान ने कहा कि मुस्लिम समुदाय धैर्य बनाए रखे और प्रदेश में शांति व्यवस्था कायम रखे। उन्होंने कहा, “अल्लाह सबसे बड़ा है, इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है। अभी कानूनी रास्ते खुले हुए हैं और मुस्लिम समाज पूरी मजबूती के साथ सर्वोच्च न्यायालय में अपनी बात रखेगा।

800 वर्षों से नमाज पढ़ी जा रही
    हिंदू पक्ष द्वारा फैसले के बाद मनाए गए जश्न पर प्रतिक्रिया देते हुए पठान ने कहा कि यह उनके लिए खुशी का विषय हो सकता है, लेकिन मुस्लिम समाज के लिए नहीं। उन्होंने दावा किया कि पिछले लगभग 800 वर्षों से उस स्थान पर नमाज अदा की जा रही है और मुस्लिम समाज लगातार वहां धार्मिक गतिविधियां करता आया है।
   उन्होंने कहा कि फैसले से मुस्लिम समुदाय के अधिकारों का हनन हुआ है। पठान के अनुसार, जिस स्थान पर वर्षों से नमाज पढ़ी जा रही थी, उसी जगह को अब पूजा स्थल घोषित किया गया है। उन्होंने दोहराया कि मुस्लिम पक्ष अदालत के आदेश का सम्मान करता है, लेकिन निर्णय से सहमत नहीं है और कानूनी लड़ाई आगे जारी रखेगा।

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