115 साल से रुकी खामगांव-जालना रेल परियोजना को गति, राज्य सरकार ने ₹2453 करोड़ के हिस्से को मंजूरी दी

कॉटन ट्रांसपोर्ट रूट’ नाम की इस रेल लाइन का काम दूसरे विश्वयुद्ध के समय से अधूरा

खामगांव (महाराष्ट्र) ।विदर्भ और मराठवाड़ा को जोड़ने वाली 115 वर्ष पुरानी खामगांव-जालना रेलवे लाइन की मांग एक बार फिर जोर पकड़ लिया। यह रेलवे परियोजना ब्रिटिश शासनकाल में ‘कॉटन ट्रांसपोर्ट रूट’ के रूप में प्रस्तावित की गई थी, जिसका उद्देश्य कपास उत्पादक क्षेत्रों को सीधे जोड़ना था। उस समय परियोजना को मंजूरी भी मिल गई थी और कार्य प्रारंभ हुआ था। लेकिन, द्वितीय विश्वयुद्ध काल के दौरान फंड की कमी के चलते यह अधूरी रह गई।

वर्षों से व्यापारी, किसान और नागरिक इस रेलवे लाइन की मांग करते आ रहे हैं। हाल ही में शीत सत्र के दौरान सांसद प्रतापराव जाधव और चिखली विधायक श्वेता महाले ने केंद्रीय रेल मंत्री से मुलाकात कर परियोजना के लिए फंड की मांग की। इसके साथ ही राज्य सरकार द्वारा 50% खर्च वहन करने की सहमति दिए जाने से उम्मीदें और मजबूत हुई हैं। हाल ही में हुई मंत्रिमंडल बैठक में जालना-खामगांव नई ब्रॉडगेज रेलवे लाइन के लिए राज्य सरकार के 2453 करोड़ रुपये के हिस्से को मंजूरी मिल चुकी है, जिससे परियोजना को गति मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

यह रेलवे मार्ग जालना काचरेवाड़ी, राममूर्ति, नव्हा, देउलगांव राजा, सिंदखेड राजा, देउलगांव माही, अंढेरा, चिखली, दहीवाड़ी, अमडापुर, जलका तेली होते हुए खामगांव रेलवे स्टेशन तक प्रस्तावित है। करीब 162 किलोमीटर लंबी इस लाइन में 16 स्टेशन होंगे। इस रूट का सर्वे पहले ही पूरा किया जा चुका है।

विदर्भ और मराठवाड़ा
को सीधे जोड़ने वाला यह महत्वपूर्ण रेल मार्ग वर्षों से ठंडे बस्ते में पड़ा था, लेकिन अब राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर मिल रहे समर्थन से उम्मीद जगी है कि जल्द ही इस ऐतिहासिक परियोजना का निर्माण कार्य शुरू होगा।

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