इंदौर में मेट्रो का सफर सुस्त, 1 महीने में सिर्फ 75 हजार यात्रियों ने यात्रा की, कमाई हुई 30 लाख, अभी कई खामियां!
इंदौर। मेट्रो का सपना आखिरकार सच तो हो गया, लेकिन शहरवासियों में इसके लग्जरी सफर को लेकर वैसी दीवानगी नहीं दिख रही जैसी उम्मीद की जा रही थी। गांधी नगर चौराहे से मालवीय नगर चौराहे तक के 17 किलोमीटर लंबे मेट्रो मार्ग को व्यावसायिक रूप से पटरी पर दौड़े हुए पूरा एक महीना बीत चुका है। इस शुरुआती एक महीने के दौरान इस रूट पर कुल मिलाकर लगभग 75 हजार मुसाफिरों ने मेट्रो की सवारी की है, जिससे मेट्रो निगम को तकरीबन 30 लाख रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ है। इन आंकड़ों के हिसाब से देखें तो रोजाना औसतन केवल 2500 लोग ही मेट्रो का उपयोग कर रहे हैं। शुरुआत के दिनों में आम जनता में जो गजब का उत्साह नजर आया था, वह बाद के कामकाजी दिनों में गायब सा दिखा।
इस बहुप्रतीक्षित रूट पर यात्री सेवा की शुरुआत 6 सितंबर को हुई थी। पहले ही दिन छह हजार से ज्यादा उत्सुक लोगों ने मेट्रो का आनंद लिया था। हालांकि, इसके बाद वर्किंग डेज में पैसेंजर्स की तादाद में भारी गिरावट दर्ज की गई। पहले हफ्ते में लगभग 21 हजार 500 लोगों ने सफर किया और टिकटों की बिक्री से करीब 8.5 लाख रुपए की आय हुई।
छुट्टियों के दिन मेट्रो में घूमने का आकर्षण
छुट्टियों के दिन, खासकर रविवार को नजारा थोड़ा जुदा रहता है। महीने में आए पांच रविवारों के दौरान यात्रियों की संख्या सामान्य दिनों से दोगुनी यानी औसतन 5 हजार के आसपास दर्ज की गई। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि रविवार के दिन बड़ी संख्या में लोग परिवार के साथ घूमने और मेट्रो का नया अनुभव लेने के लिए खिंचे चले आ रहे हैं, जिस वजह से इस दिन भीड़ अधिक रहती है।
किराया महंगा और पार्किंग सुविधा नदारद
रोजमर्रा आने-जाने वाले यात्रियों के लिए किराया और कनेक्टिविटी सबसे बड़ी मुश्किलें खड़ी कर रही हैं। 20 से 70 रुपए तक का टिकट दाम आम बसों और ई-रिक्शा के मुकाबले महंगा पड़ता है। इसके ऊपर, स्टेशन पर उतरने के बाद अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए दूसरा साधन ढूंढना मजबूरी बन जाता है। इसके अलावा, बापट चौराहे को छोड़कर अधिकांश खुले मेट्रो स्टेशनों पर वाहन खड़े करने के लिए पर्याप्त पार्किंग स्पेस नहीं है, जिससे दोपहिया या चारपहिया वाहनों से आने वाले लोगों को भारी असुविधा होती है।
मेट्रो का यह मार्ग अभी आईएसबीटी कुमेड़ी, देवी अहिल्याबाई होलकर एयरपोर्ट और खजराना चौराहे जैसे अहम इलाकों तक नहीं पहुंच पाया है। इन प्रमुख क्षेत्रों के जुड़ने के बाद ही मुसाफिरों की संख्या में उछाल आने की आस है।
रियायत के बावजूद यात्री संख्या नहीं बढ़ी
यात्रियों की संख्या बढ़ाने के लिए मध्यप्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने कई तरह की रियायतें भी दी हैं। वापसी का टिकट कटाने पर 5 प्रतिशत और ग्रुप में सफर करने पर 10 प्रतिशत की छूट दी जा रही है। इसके अलावा, मोबाइल ऐप के जरिए भुगतान करने पर 8 से 15 प्रतिशत तक का अतिरिक्त फायदा भी मिल रहा है।

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