स्वच्छ शहर इंदौर में 243 फैक्ट्रियों से फैल रहा प्रदूषण, हाई कोर्ट की सख्ती के बाद प्रदूषण बोर्ड जागा

ऐसे उद्योगों को बिजली कंपनी ने कनेक्शन काटने के नोटिस दिए, अगली सुनवाई 9 फरवरी को

इंदौर। बिना अनुमति चलने वाले  और खुलेआम प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को लेकर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया। इसके बाद मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मंडल को कड़ी फटकार लगाई। यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई सामने आई। इस तरह स्वच्छता के खिताब के पीछे छुपे जल और वायु प्रदूषण के काले सच पर आखिरकार हाईकोर्ट की नजर पड़ ही गई। 

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के कड़े निर्देश के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इंदौर जिले के 243 उद्योगों को नोटिस थमाए हैं। इनमें कई ऐसे उद्योग शामिल हैं, जिनके पास न लाइसेंसधारी हैं और न वे प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का पालन कर रहे हैं। बोर्ड ने साफ कर दिया है कि अब सिर्फ नोटिस नहीं देंगे, बल्कि बिजली कनेक्शन काटकर उद्योगों को बंद कराया जाएगा।

इससे हवा की गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर

स्वच्छ शहर में जहां एक ओर इंदौर का पानी दूषित पाया जा चुका, वहीं दूसरी ओर हवा की गुणवत्ता भी लगातार खतरनाक स्तर की ओर बढ़ रही है। हाईकोर्ट ने माना है कि यह स्थिति मध्यप्रदेश जल प्रदूषण निवारण और वायु प्रदूषण निवारण अधिनियमों का खुला उल्लंघन है। खनन, स्टोन क्रशर और रेड-ऑरेंज श्रेणी के उद्योग सबसे बड़े प्रदूषणकर्ता बनकर सामने आए हैं। इन उद्योगों के कारण न सिर्फ पर्यावरण खतरे में है, बल्कि निवासियों की सेहत पर भी सीधा असर पड़ रहा है।

उद्योगों की लिस्ट बिजली कंपनी को सौंपी 

 प्रदेश के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के इंदौर रीजनल ऑफिसर सतीश चौकसे ने स्वीकार किया कि 243 उद्योगों को नोटिस दिए गए हैं। कई उद्योग बिना अनुमति संचालित हो रहे हैं। ऐसे उद्योगों की सूची बिजली कंपनी को सौंप दी गई है ताकि सीधे बिजली काटी जा सके।

अगली सुनवाई 9 फरवरी को     

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में पेश रिपोर्ट के मुताबिक जिले में 5961 उद्योग पंजीकृत हैं, जिनमें से 1000 से ज्यादा उद्योग प्रदूषण विभाग की बिना अनुमति चलते पाए गए। कई उद्योग सालों से नियमों को ताक पर रखकर काम कर रहे, जबकि प्रशासन आंख मूंदे बैठा रहा। अब इस मामले में 9 फरवरी को हाईकोर्ट में अगली सुनवाई होगी। महाधिवक्ता प्रदूषण बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर जवाब पेश करेंगे। साफ है कि अगर जवाब संतोषजनक नहीं रहा, तो और बड़ी कार्रवाई तय मानी जा रही है।

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