कीमती सागौन का गायब हो जाना वन विभाग की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा
दमोह। तेंदूखेड़ा उपवन मंडल अंतर्गत झलौन वन परिक्षेत्र कार्यालय प्रांगण से सागौन की कीमती सिल्लियों की चोरी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जिस परिसर में रेंजर, डिप्टी रेंजर सहित अन्य वनकर्मी निवासरत रहते हैं और जिसे वन डिपो के रूप में भी उपयोग किया जाता है, वहीं से कीमती सागौन का गायब हो जाना वन विभाग की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

सात सिल्लियों में से दो गायब
जानकारी के अनुसार,कार्यालय परिसर में रखी सात सागौन की सिल्लियों में से क्रमांक-एक और सात की दो सिल्लियां तीन दिनों के भीतर अज्ञात चोर चुरा ले गए। चोरी गई सिल्लियों की कीमत हजारों रुपए बताई जा रही है। खास बात यह है कि रात के समय कार्यालय प्रांगण का मुख्य गेट बंद कर ताला लगाया जाता है। इसके बावजूद चोरी की घटना ने विभागीय निगरानी व्यवस्था की पोल खोल दी है। घटना सामने आते ही वन अमले में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इस मामले को लेकर स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि जब वन विभाग अपने ही कार्यालय परिसर की संपत्ति सुरक्षित नहीं रख पा रहा है, तो जंगलों में फैली बहुमूल्य वन संपदा की सुरक्षा कैसे संभव है। लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
ये कहा वन अधिकारियों ने
डिप्टी रेंजर शंकर सिंह ठाकुर ने बताया कि वे फिलहाल फील्ड में हैं और रेंजर से सूचना मिली है। बीट गार्डों को बुलाकर यह पता लगाया जाएगा कि कुल कितनी सागौन की सिल्लियां परिसर में लाई गई थीं। वन परिक्षेत्र अधिकारी झलौन सतीश मसीह ने कहा कि सागौन की सिल्लियों के गायब होने की जानकारी मिली है और मामले की गंभीरता से जांच कराई जा रही है।

जिसकी अभिरक्षा में सिल्लियां थी, उससे वसूली होगी
उपवन मंडल अधिकारी प्रतीक दुबे ने स्पष्ट किया कि यदि चोरी की पुष्टि होती है,तो जिसकी अभिरक्षा में सिल्लियां थी, उससे नियमानुसार वसूली की जाएगी। वहीं वन मंडल अधिकारी दमोह ईश्वर जलांडे ने कहा कि सागौन की सिल्लियां विभागीय रिकॉर्ड में दर्ज रहती हैं और पूरे मामले की जानकारी लेकर जिम्मेदार कर्मचारियों पर नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। वन विभाग ने जांच के आदेश जारी कर दिए हैं और दोषियों को बख्शे जाने की बात से इनकार किया है।