प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वेच्छा से इस्लाम धर्म अपनाने के कारण अपने पिता द्वारा अवैध रूप से घर में कैद करके रखी गईं दो युवतियों के मामले में सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को स्वीकार करते हुए आरोपी पिता और राज्य सरकार को दोनों बहनों को 25 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया है। जस्टिस संदीप जैन की पीठ ने यह आदेश दिया भाटिया उर्फ जोया दिया भाटिया (20) और उनकी बहन अंशु भाटिया उर्फ अमीना अंशु भाटिया (35) की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया।
6 अगस्त को हाईकोर्ट के सामने उपस्थित हुई दोनों बहनों ने अदालत को बताया कि उन्होंने पूरी तरह अपनी मर्जी से इस्लाम स्वीकार किया है। अंशु ने 2020 में और दिया ने 2021 में धर्म परिवर्तन किया था। उन्होंने किसी भी तरह के दबाव, धोखाधड़ी, अनुचित प्रभाव या लालच से साफ इनकार किया। दोनों युवतियों ने अदालत के समक्ष अपनी बात रखते हुए आरोप लगाया कि धर्म परिवर्तन की जानकारी मिलने के बाद उनके पिता ने उन्हें घर में ही बंधक बना लिया था।
व्यक्तिगत स्वतंत्रता में परिवार या सरकार का दखल बर्दाश्त नहीं
युवतियों के बयान दर्ज करने के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि उनके उत्तर एकदम स्पष्ट, सहज और सुसंगत थे। इससे किसी भी प्रकार के भय या दबाव का कोई संकेत नहीं मिला। अदालत ने स्पष्ट किया कि दोनों बहनें बालिग हैं और उन्हें अपने जीवन से जुड़े फैसले खुद लेने का पूरा कानूनी अधिकार है। जब कोई नागरिक कानूनन बालिग हो जाता है, तो देश का संविधान उसे आस्था, आवास और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के प्रत्येक पहलू पर फैसला करने का अधिकार देता है। इसमें परिवार या राज्य सरकार कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकती।
एफआईआर की जांच जारी, पर बंधक बनाना गैर-कानूनी
मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने याचिका का विरोध किया। सरकारी पक्ष ने दलील दी कि युवतियों के पिता ने जबरन और धोखे से धर्मांतरण कराने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी और यह मामला किसी बड़े संगठित षडयंत्र का हिस्सा हो सकता है, जिससे देश की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।
इस पर हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि दर्ज कराई गई एफआईआर की जांच कानून के अनुसार चलती रहेगी और अदालत की टिप्पणियों का उस जांच पर कोई असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, अदालत ने यह साफ तौर पर पाया कि दोनों युवतियों को उनके पिता के घर में गैर-कानूनी तरीके से कैद करके रखा गया था, जो कि उनके अधिकारों का उल्लंघन है। इसी आधार पर कोर्ट ने भारी मुआवजे का फैसला सुनाया।