छिंदवाड़ा। मध्य प्रदेश में सरकारी सब्सिडी वाले चावल की हेराफेरी कर उसे दोबारा सरकारी एजेंसियों को ही कई गुना अधिक कीमत पर बेचने का बड़ा मामला सामने आया है। फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एफसीआई) की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच में इस पूरे कारोबार का खुलासा हुआ है। पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में एक संगठित नेटवर्क के सक्रिय होने के संकेत मिले हैं। पूरे मामले की तह तक पहुंचने के लिए विशेष जांच दल का गठन किया गया है। जानकारी के अनुसार, एफसीआई ने शिकायत दर्ज कराई थी कि छिंदवाड़ा स्थित एक एथनॉल यूनिट के लिए भेजी गई सरकारी चावल की खेप निर्धारित स्थान तक पहुंची ही नहीं। नवीनगांव स्थित एफसीआई डिपो से तीन ट्रकों में चावल रवाना किया गया था, लेकिन उनमें से एक ट्रक रास्ते से गायब हो गया। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की।
इस मिल में मिला लापता ट्रक
जांच के दौरान पुलिस ने लापता ट्रक को बालाघाट जिले के वारासिवनी स्थित सांचेती राइस मिल में खड़ा बरामद किया। ट्रक में 242 क्विंटल सरकारी चावल भरा हुआ था। पुलिस ने ट्रक को अपने कब्जे में ले लिया है। वहीं, इसी खेप के दो अन्य ट्रकों की तलाश अब भी जारी है। अधिकारियों का मानना है कि उनसे भी इस पूरे मामले के अहम सुराग मिल सकते हैं।
चावल दोबारा सरकारी व्यवस्था में शामिल
विशेष जांच दल की प्रारंभिक पड़ताल में सामने आया है कि सरकारी सब्सिडी वाला चावल पहले निजी राइस मिलों तक पहुंचाया जाता था। इसके बाद उसी चावल को दोबारा कस्टम मिलिंग प्रक्रिया में शामिल कर सरकारी एजेंसियों को ही बेचा जाता था। इस तरीके से एक ही चावल को बार-बार सरकारी खरीद प्रणाली में शामिल कर शासन को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया जा रहा था।
सरकार को चुकानी पड़ रही 6 गुना कीमत
जांच अधिकारियों के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया के कारण सरकार को उसी चावल के लिए 4 से 6 गुना तक अधिक कीमत चुकानी पड़ रही थी। यानी सरकारी सब्सिडी वाला चावल निजी स्तर पर घुमाकर फिर से सरकारी खरीद में शामिल किया जाता था और भुगतान भी दोबारा लिया जाता था। प्रारंभिक जांच में इसे बड़े आर्थिक घोटाले की आशंका के रूप में देखा जा रहा है। पुलिस ने मामले में एवीजे एग्रिको प्राइवेट लिमिटेड के अधिकृत प्रतिनिधि राहुल प्रताप, ट्रक चालक दुर्गेश शेंडे, सांचेती राइस मिल के संचालक सौरभ सांचेती समेत अन्य के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। अब तक 4 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच अधिकारियों का कहना है कि अब तक सामने आए तथ्य पूरे मामले का केवल एक हिस्सा हैं। आशंका है कि इस नेटवर्क में कई बड़े परिवहन कारोबारी, निजी कंपनियां और अन्य संबंधित लोग भी शामिल हो सकते हैं। विशेष जांच दल पूरे लेन-देन, परिवहन व्यवस्था और चावल की आवाजाही से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रहा है, ताकि इस पूरे रैकेट का खुलासा किया जा सके।