इंदौर। चर्चित शिवानी हत्याकांड में करीब 6.5 साल के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार इंसाफ हो गया है। अदालत ने बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दी गई, खौफनाक वारदात पर अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने मृतका के पति अमितेश उर्फ शालू पटेरिया को अपनी ही पत्नी की हत्या का मुख्य दोषी करार दिया है।
28वें एडिशनल सेशंस जज हेमंत कुमार रघुवंशी की अदालत ने मुजरिम को आजीवन कठोर कारावास की सजा से दंडित किया है। इसके साथ ही सबूत नष्ट करने और एक बेजुबान कोबरा सांप की जान लेने के जुर्म में भी उसे अलग-अलग कैद और जुर्माने की सजा दी गई है। अदालत ने साफ किया कि मुजरिम ने इस मर्डर को सांप के काटने से हुई नेचुरल डेथ साबित करने की पूरी स्क्रिप्ट लिखी थी, परंतु साइंटिफिक इन्वेस्टिगेशन और पुख्ता कड़ियों ने उसकी इस चालाकी को मटियामेट कर दिया।
साजिश के तहत पत्नी की हत्या
सरकारी पक्ष के मुताबिक, यह खौफनाक घटना 1 दिसंबर 2019 की है। कनाड़िया रोड के संचार नगर एक्सटेंशन में स्थित घर पर अमितेश उर्फ शालू पटेरिया ने अपने मददगारों के साथ मिलकर पत्नी शिवानी का तकिये से मुंह और नाक भींचकर मर्डर कर दिया था। इस सनसनीखेज जुर्म को हादसा दिखाने के इरादे से आरोपी ने एक खतरनाक जिंदा कोबरा सांप का इंतजाम किया और शिवानी की लाश पर उससे डसवाया।
उसका सोचना था कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह स्नेकबाइट आएगी और वह साफ बच निकलेगा। अपनी साजिश को मुकम्मल करने के लिए उसने वारदात के बाद उस कोबरा सांप को भी मार डाला, ताकि क्राइम का कोई भी सिरा बाकी न रहे।
पुलिस ने जब इस मामले की गहराई से तफ्तीश शुरू की, तो मौके से मिले साइंटिफिक एविडेंस, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, एफएसएल जांच और कड़ी से कड़ी जोड़कर इस रहस्यमयी मौत का पर्दाफाश कर दिया।
दहेज के लिए यह हत्या की
पुलिस जांच में यह सच भी बाहर आया कि शादी के बाद से ही शिवानी को दहेज और पैसों के लिए लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से टॉर्चर किया जा रहा था। सरकारी वकील ने कोर्ट में अकाट्य सबूतों के साथ यह साबित किया कि पहले गला घोंटकर हत्या की गई और फिर कानून की आंखों में धूल झोंकने के लिए सर्पदंश का स्वांग रचा गया।
साक्ष्य मिटाने की सजा अलग से
मामले के तमाम गवाहों और सबूतों को मद्देनजर रखते हुए अदालत ने आरोपी को भारतीय न्याय संहिता के तहत मर्डर का मुजरिम पाया। कोर्ट ने शिवानी की हत्या के जुर्म में मुजरिम को उम्रकैद और 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया। साक्ष्य मिटाने की धारा में 2 साल की सख्त कैद और 10000 रुपये का अर्थदंड दिया गया। वहीं, वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के तहत संरक्षित प्रजाति के कोबरा (नाजा-नाजा) को मारने के आरोप में 3 साल की जेल और 25000 रुपये के जुर्माने की सजा मुकर्रर की।