मेघालय हाईकोर्ट ने सोनम की गिरफ़्तारी की पुलिस प्रक्रिया पर सवाल उठाए, हस्ताक्षर वाली चेकलिस्ट में हत्या का जिक्र नहीं !

शिलांग। बहुचर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में आरोपी सोनम को मिली जमानत के खिलाफ मेघालय हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी प्रक्रिया में कई खामियों की ओर इशारा किया है। कोर्ट ने अपने 20 पेज के आदेश में कहा कि गिरफ्तारी के दौरान शिलांग पुलिस ने कानूनी प्रक्रियाओं का ठीक से पालन नहीं किया, जिससे आरोपी के मौलिक अधिकार प्रभावित हुए। 27 अप्रैल 2026 को जिला कोर्ट ने सोनम को जमानत देते हुए माना कि गिरफ्तारी के समय पुलिस ने जरूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया। कोर्ट ने यह भी कहा कि सोनम को यह नहीं बताया था कि उसे किस मामले में पकड़ा गया है, जो संविधान के अनुच्छेद 22(1) और बीएनएस की धारा 47(1) के प्रावधानों के विपरीत है। शिलांग पुलिस की जमानत चुनौती याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी के समय तैयार की गई चेकलिस्ट पर टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि जिस चेकलिस्ट पर सोनम से हस्ताक्षर कराए गए, उसमें राजा की हत्या या उस पर लगे हत्या के आरोप का कहीं भी उल्लेख नहीं था।

हत्याकांड से सीधा संबंध नहीं
इसके बजाय चेक लिस्ट में ऐसे सामान्य सवाल शामिल थे, जिनका इस मामले से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं था। इनमें पूछा गया था कि, क्या वह विदेश में किसी अपराध में शामिल रही है, क्या वह रिहा कैदी है जिसने पता बदलने की सूचना नहीं दी या उसके पास चोरी की संदिग्ध संपत्ति है। हाईकोर्ट ने कहा कि इस तरह की चेक लिस्ट आरोपी को गिरफ्तारी के वास्तविक कारणों की प्रभावी जानकारी देने में विफल रही।

सिर्फ एक दस्तावेज में ही नहीं
सुनवाई के दौरान मेघालय सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल अमित कुमार ने दलील दी कि दस्तावेजों में धारा 103(1) की जगह 403(1) लिखा जाना केवल टाइपिंग की त्रुटि थी। हालांकि सोनम के वकील एस थापा ने कहा कि यह गलती सिर्फ एक दस्तावेज तक सीमित नहीं थी। गिरफ्तारी पत्र, चेकलिस्ट, निरीक्षण दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड में भी यही धारा लिखी गई।

गाजीपुर कोर्ट की प्रक्रिया पर सवाल
एडवोकेट अमित कुमार ने बताया कि सोनम को गिरफ्तारी के समय लगे आरोपों की जानकारी थी। गाजीपुर में गिरफ्तारी के बाद उसे कोर्ट में पेश किया गया था, जहां से ट्रांजिट रिमांड मंजूर हुई। बाद में शिलांग कोर्ट में भी पूछा था कि क्या उसे गिरफ्तारी और आरोपों की जानकारी है, जिस पर उसने सहमति जताई थी। वहीं, बचाव पक्ष ने कहा कि गाजीपुर कोर्ट के आदेश में भी गिरफ्तारी के कारण स्पष्ट दर्ज नहीं किए थे। इसलिए केवल बाद की कार्यवाही का हवाला देकर गिरफ्तारी प्रक्रिया में हुई कानूनी कमियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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