भोपाल। मध्य प्रदेश में अपनी राजनीतिक जमीन को और पुख्ता करने के लिए कांग्रेस आज से तीन दिनों के गहन विचार-विमर्श के दौर में जुट गई है। 7 से 9 फरवरी तक चलने वाली इन बैठकों का नेतृत्व प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी कर रहे हैं। इन बैठकों का एजेंडा महज औपचारिकता न होकर, संगठन को बूथ स्तर तक धारदार बनाना है।
बैठकों का विस्तृत कार्यक्रम:
7 फरवरी (प्रथम दिन): मतदाता सूची पर नजर
आज की बैठक का मुख्य केंद्र ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) प्रक्रिया है। कांग्रेस का मानना है कि मतदाता सूची में गड़बड़ियां हो रही हैं। पार्टी नेतृत्व जिला और संभाग के नेताओं से मिले फीडबैक के आधार पर चुनाव आयोग और सरकार के घेराव की रणनीति तैयार कर रहा है।
8 फरवरी (द्वितीय दिन): भोपाल संभाग की समीक्षा
रविवार को भोपाल संभाग के सभी जिला और ब्लॉक अध्यक्षों की क्लास लगेगी। इसमें कार्यकर्ताओं की जवाबदेही तय होगी। सूत्रों की मानें तो निष्क्रिय इकाइयों में बदलाव की गाज गिर सकती है, जबकि बेहतर काम करने वाली इकाइयों को पुरस्कृत किया जाएगा।
9 फरवरी (तृतीय दिन): उज्जैन संभाग पर फोकस
अंतिम दिन उज्जैन संभाग के पदाधिकारियों के साथ स्थानीय ज्वलंत मुद्दों जैसे—किसानी, बेरोजगारी और युवा आक्रोश पर चर्चा होगी। पार्टी का लक्ष्य इन मुद्दों को लेकर सड़कों पर उतरने का है।
क्यों खास है यह कवायद? राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, हरीश चौधरी की यह सक्रियता संकेत है कि कांग्रेस अब ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति से बाहर निकलकर आक्रामक मोड में आ रही है। संगठन में संभावित फेरबदल और नई ऊर्जा का संचार करना इस पूरी कवायद का मूल मंत्र है।
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