टाइगर स्टेट’ मध्यप्रदेश में साल 2025 में 55 बाघों की मौत, जबकि, पूरे देश में 164 बाघों की मौत हुई, सीएम ने रिपोर्ट मांगी

वन विभाग के अफसर मामले की लीपा पोती में लगे, 145 करोड़ की योजना को सरकार की मंजूरी

भोपाल। देश में ‘ टाइगर स्टेट’ कहे जाने वाले मध्य प्रदेश में भी बाघ सुरक्षित नहीं हैं। देश में पिछले एक साल में बाघों की मौत के मामले में मध्यप्रदेश सबसे आगे हैं। देश में कुल 164 मौतें हुई। 55 बाघों ने मध्यप्रदेश में दम तोड़ा। इनमें से 36 मामले ऐसे हैं, जिनमें शिकार की आशंका जताई गई। देश के ‘टाइगर स्टेट’ में इतनी बड़ी संख्या में बाघों की मौत ने वन्यजीव संरक्षण और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब इन घटनाओं पर लीपा पोती की जा रही। मध्यप्रदेश में बाघों के मौत के आंकड़े वास्तव में चौंकाने वाले हैं। बाघों के लिए सबसे सुरक्षित कहे वाले मध्यप्रदेश में इनकी सबसे ज्यादा मौतें सामने आई। 

1973 के बाद सबसे ज्यादा मौते इसी साल

बाघों की घटती आबादी और बेतहाशा शिकार व इनके अंगों के अवैध कारोबार को रोकने तथा जंगल के राजा को संरक्षित करने के लिए तत्कालीन केंद्र सरकार ने ‘टाइगर प्रोजेक्ट’ वर्ष 1973 में लांच किया था। उसके बाद से लेकर अब तक बीते 52 सालों में बाघों की मौतें होती रही। लेकिन, साल 2025 में मध्य प्रदेश में जो 55 मौतों का आंकड़ा सामने आया है, यह अब तक का सबसे ज्यादा है।

गले नहीं उतर रहे वन विभाग के तर्क
वन विभाग के अधिकारी इन मौतों को स्वाभाविक बताते हुए तर्क दे रहे हैं कि बाघ शावकों का सर्वाइवल रेट 50% से भी कम होता है। उनका यह भी कहना है कि प्रदेश में मौतों की तुलना में बाघों की कुल संख्या में वृद्धि हुई। हालांकि, यह तर्क मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को संतुष्ट नहीं कर पाया। उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए वन विभाग से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

बाघों के शिकार की आशंका ज्यादा

‘टाइगर स्टेट’ में बाघों की लगातार हो रही मौतें अब राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गई। विशेष रूप से बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व और उससे सटे इलाकों में बाघों के शिकार की आशंका जताई जा रही है। इसे देखते हुए वन विभाग ने हाई अलर्ट जारी किया और मैदानी अमले को पूर्व के आदतन शिकारियों के संबंध में जानकारी एकत्र करने के निर्देश दिए गए हैं।

सवालों से घिरा मध्यप्रदेश का वन विभाग 

 मध्य प्रदेश के वन बल प्रमुख वीएन अम्बाडे भी लगातार बाघों की मौतों पर सवाल उठाते रहे हैं। माना जा रहा है कि इस मामले में लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार वन अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है। संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाए गए कई बाघों की मौत को पहले हादसा या प्राकृतिक कारण बताया गया, लेकिन अब इन्हें शिकार से जोड़कर देखा जा रहा है।

बाघों की मौतों को लेकर रुख सख्त
पिछली बाघ गणना के अनुसार प्रदेश में 785 बाघ मौजूद हैं। आगामी वन्यजीव गणना में यह संख्या और बढ़ने का अनुमान लगाया जा है। इसके बावजूद बाघों की लगातार हो रही मौतों को लेकर वन बल प्रमुख वीएन अम्बाडे ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट किया है कि अब केवल पत्राचार नहीं होगा, बल्कि लापरवाह और जिम्मेदार अधिकारियों पर सीधे कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

145 करोड़ की योजना को मिली मंजूरी

वन क्षेत्रों के आसपास मानव आवागमन को नियंत्रित करने और मानव-बाघ द्वंद्व को रोकने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने इस वर्ष 145 करोड़ रुपए की योजना को मंजूरी दी है। यह योजना वित्तीय वर्ष 2025-26, 2026-27 और 2027-28 में लागू की जाएगी। यह फैसला प्रदेश में बाघों की संख्या में हुई तेज वृद्धि को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। वर्ष 2018 में मध्य प्रदेश में बाघों की संख्या 526 थी, जो हाल के वर्षों में बढ़कर 785 हो गई है।

बाघों का सर्वाइवल रेट 50% से भी कम

मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक (मध्यप्रदेश) सुभरंजन सेन के मुताबिक, बाघों का सर्वाइवल रेट 50% से भी कम होता है। रही शिकार की बात तो इसकी आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता। हमने हाई अलर्ट जारी किया है। शिकारियों की धरपकड़ भी की जा रही है। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय शिकारियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश कर जेल भेजा गया है।

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