इंदौर में बाघों की गणना के पहले दिन ही मिले 20 संकेत, जंगलों में बाघों की दहाड़ तेज

AITE 2026 की शुरुआत में इंदौर वन मंडल से उत्साहजनक संकेत, 2022 की तुलना में दोगुना इजाफा

इंदौर। ऑल इंडिया टाइगर एस्टीमेशन (AITE) 2026 की शुरुआत के साथ ही इंदौर वन मंडल से बेहद सकारात्मक और उत्साहवर्धक संकेत सामने आए हैं।डीएफओ प्रदीप मिश्रा के अनुसार, गणना के पहले ही दिन 20 बाघों के संकेत दर्ज किए गए हैं, जो वर्ष 2022 की पूरी गणना में मिले 10 संकेतों की तुलना में दोगुने हैं। यह आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि अब बाघ इंदौर के वनों से अधिक नियमित रूप से गुजर रहे हैं और उनकी मौजूदगी पहले की अपेक्षा कहीं अधिक मजबूत और विश्वसनीय हो गई है।

वन क्षेत्रवार आंकड़ों पर नजर डालें तो चोरल रेंज सबसे आगे रही है। यहां की 33 बीटों में 18 बाघ संकेत दर्ज किए गए हैं। वहीं महू रेंज में 20 बीटों के दौरान 2 संकेत और इंदौर रेंज में 26 बीटों में 1 बाघ का संकेत मिला है। यह स्पष्ट करता है कि बाघों की आवाजाही पूरे वन मंडल में फैली हुई है और यह केवल इक्का-दुक्का घटनाएं नहीं हैं, बल्कि एक स्थापित वन्यजीव कॉरिडोर की ओर संकेत करती हैं।

डीएफओ के अनुसार, इस बार दर्ज किए गए सभी संकेत वैज्ञानिक मानकों पर आधारित हैं। कैमरा ट्रैप,फील्ड सर्वे, पैरों के निशान,स्कैट और अन्य आधुनिक तकनीकों के माध्यम से निगरानी की जा रही है, जिससे आंकड़ों की प्रामाणिकता सुनिश्चित हो सके।

AITE 2026 का संचालन राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) द्वारा किया जा रहा है। इंदौर जिले के लगभग 700 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र को 2 वर्ग किलोमीटर के ग्रिड में विभाजित कर सर्वेक्षण किया जा रहा है।

गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में बाघों की संख्या 2018 में 526 से बढ़कर 2022 में 785 तक पहुंच चुकी है। इंदौर वन मंडल में मिले ये मजबूत संकेत बताते हैं कि संरक्षित क्षेत्रों के बाहर के जंगल भी बाघ संरक्षण में अहम भूमिका निभा रहे हैं। AITE 2026 के अंतिम नतीजे जुलाई 2026 तक आने की संभावना है, जो भविष्य की संरक्षण रणनीतियों की दिशा तय करेंगे।

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