71 रुपये का इथेनॉल, फिर पेट्रोल 100 रुपये के आसपास क्यों, सरकार का मकसद पेट्रोल सस्ता करना नहीं, कच्चे तेल का आयात घटाना! 

नई दिल्ली। देश में इन दिनों ई20 पेट्रोल को लेकर बहस तेज है। कई लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि जब पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाया जा रहा है, जिसकी औसत कीमत पेट्रोल से कम बताई जाती है, तो उपभोक्ताओं को पेट्रोल सस्ता क्यों नहीं मिल रहा? इस सवाल के पीछे सबसे बड़ा कारण इथेनॉल की खरीद लागत और सरकार की ईंधन नीति है। भारत में इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम (ईबीपी) के तहत वर्ष 2014 से पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की शुरुआत हुई थी। केंद्र सरकार ने वर्ष 2030 तक पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य रखा था, लेकिन यह लक्ष्य तय समय से करीब पांच वर्ष पहले ही हासिल कर लिया गया। इसके बाद देश में ई20 पेट्रोल की आपूर्ति शुरू हो गई।

आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता घटाना केंद्र सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य पेट्रोल की कीमत कम करना नहीं, बल्कि आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता घटाना है। सरकार के अनुसार वर्ष 2014-15 से अब तक इथेनॉल मिश्रण के कारण लगभग 310 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल के आयात से बचाव हुआ है। इससे 1.90 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई, जबकि इथेनॉल की खरीद के माध्यम से किसानों को 1.60 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान किया गया।

डिस्टिलरियों में बनता है इथेनॉल 
इथेनॉल का उत्पादन देश की डिस्टिलरियों में होता है और तेल विपणन कंपनियां इसे सरकार द्वारा निर्धारित दरों पर खरीदती हैं। इथेनॉल की कीमत हर वर्ष केंद्र सरकार तय करती है। काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर की रिपोर्ट के अनुसार, इथेनॉल सप्लाई वर्ष 2024-25 के दौरान इथेनॉल खरीद की कुल लागत लगभग 87,390 करोड़ रुपये रही। इसमें 62,566 करोड़ रुपये तेल कंपनियों ने इथेनॉल खरीदने पर खर्च किए, जबकि 24,824 करोड़ रुपये विभिन्न प्रकार की सब्सिडी और अन्य मदों में व्यय हुए। इथेनॉल सप्लाई वर्ष की अवधि 1 नवंबर से 31 अक्टूबर तक मानी जाती है।

इथेनॉल की प्रति लीटर कीमत 65.61 रूपए 
वर्तमान में गन्ने से तैयार होने वाले 1 लीटर इथेनॉल की सरकारी कीमत 65.61 रुपये और मक्के से बनने वाले इथेनॉल की कीमत 71.86 रुपये है। दोनों स्रोतों को मिलाकर औसतन एक लीटर इथेनॉल की लागत करीब 71 रुपये बैठती है। यही वजह है कि पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने से ईंधन की लागत में कोई बड़ी कमी नहीं आती और इसका सीधा लाभ उपभोक्ता को कम कीमत के रूप में नहीं मिल पाता।

देश में इतना हुआ इथेनॉल उत्पादन 
इथेनॉल उत्पादन में भी पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार वर्ष 2014 में देश में इथेनॉल का उत्पादन 38 करोड़ लीटर था, जो जून 2025 तक बढ़कर 661.1 करोड़ लीटर पहुंच गया। वहीं, केंद्र सरकार ने राज्यसभा में जानकारी दी थी कि इथेनॉल सप्लाई वर्ष 2024-25 के दौरान 1,000 करोड़ लीटर से अधिक इथेनॉल पेट्रोल में मिलाया गया, जिससे ई20 लक्ष्य हासिल हुआ। सरकार का दावा है कि देश में अब प्रतिवर्ष लगभग 20 अरब लीटर इथेनॉल उत्पादन की क्षमता विकसित हो चुकी है।

इथेनॉल मिश्रण का बड़ा कारण 
सरकार का तर्क है कि इथेनॉल मिश्रण का सबसे बड़ा लाभ ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है। आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता घटने से वैश्विक बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव का असर सीमित होता है। सरकार का यह भी दावा है कि पिछले चार वर्षों में भारत में पेट्रोल की कीमतों में 6 प्रतिशत से भी कम वृद्धि हुई है और इसमें इथेनॉल मिश्रण नीति की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इस तरह ई20 पेट्रोल का उद्देश्य उपभोक्ताओं को तत्काल सस्ता पेट्रोल उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि दीर्घकाल में ऊर्जा आत्मनिर्भरता, विदेशी मुद्रा की बचत और किसानों की आय बढ़ाने जैसे व्यापक लक्ष्यों को हासिल करना है।

Leave a Comment