गोरखपुर। जिम्मेदारियों और पदों की ऊंचाइयों के बीच भी पुरानी दोस्ती का रिश्ता कायम रह सकता है, इसका उदाहरण गुरुवार को गोरखपुर में देखने को मिला। भारतीय वायुसेना के एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह अपनी पत्नी सरिता सिंह के साथ माथाबारी स्थित सरस्वती गुरुकुल पहुंचे। यहां उन्होंने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष संजय सिंह श्रीनेत से मुलाकात की और गुरुकुल के विद्यार्थियों से संवाद किया।
एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह और संजय सिंह श्रीनेत की मित्रता करीब 30 वर्ष पुरानी है। दोनों की मुलाकात प्रशिक्षण के दौरान हुई थी। करीब 1 वर्ष तक साथ प्रशिक्षण लेने के दौरान दोनों के बीच मित्रता गहरी हुई। इसके बाद दोनों अलग-अलग सेवाओं में चले गए। लेकिन, समय और जिम्मेदारियों के बदलाव के बावजूद उनकी दोस्ती बनी रही। संजय सिंह श्रीनेत के आमंत्रण पर एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह गुरुकुल पहुंचे। इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों से बातचीत की और उन्हें जीवन में लक्ष्य तय करने, अच्छे संस्कार अपनाने तथा राष्ट्रसेवा की भावना के साथ आगे बढ़ने की सीख दी। उन्होंने विद्यार्थियों को सफलता के लिए अनुशासन, मेहनत और स्पष्ट उद्देश्य को जरूरी बताया।

प्रशासनिक सेवा से विदेश तक रहा संजय सिंह का सफर
गोरखपुर के विकासखंड भरोहिया की ग्राम पंचायत बढ़या के मूल निवासी संजय सिंह श्रीनेत का प्रशासनिक सफर वर्ष 1993 में भारतीय राजस्व सेवा में चयन के साथ शुरू हुआ। उनकी पहली नियुक्ति राजस्थान के श्रीगंगानगर में सीमा शुल्क के अपर आयुक्त के रूप में हुई।
इसके बाद उन्होंने राजस्थान के भिवाड़ी में आबकारी आयुक्त की जिम्मेदारी संभाली। उनकी तीसरी नियुक्ति मुंबई हवाई अड्डे पर सीमा शुल्क आयुक्त के पद पर हुई। प्रशासनिक सेवा के दौरान उन्हें विदेश में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली। वे लंदन स्थित भारतीय दूतावास में प्रथम उच्चायुक्त के पद पर कार्यरत रहे।
प्रशिक्षण के दिनों की मित्रता में कोई कमी नहीं
विदेश से लौटने के बाद संजय सिंह श्रीनेत की तैनाती राजस्थान में प्रवर्तन निदेशालय में हुई। इसके बाद उन्होंने चंडीगढ़ में प्रवर्तन निदेशालय के विशेष निदेशक की जिम्मेदारी संभाली। इसी पद से उन्होंने सेवानिवृत्ति ली। करीब तीन दशक के अंतराल के बाद भी प्रशिक्षण के दिनों की मित्रता में कोई कमी नहीं आई। गुरुवार को गुरुकुल में हुई मुलाकात ने दोनों मित्रों के पुराने रिश्ते को फिर से सामने ला दिया। पद और सेवा के अलग-अलग रास्तों पर आगे बढ़ने के बावजूद दोनों के बीच कायम आत्मीयता विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा का प्रसंग बनी।