नई दिल्ली। अगस्त 2026 देश के मौसम इतिहास में गर्मी का नया रिकॉर्ड छोड़ गया। भारत मौसम विज्ञान विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 1901 के बाद यह अब तक का सबसे गर्म अगस्त रहा। महीने का औसत तापमान करीब 28°C दर्ज किया गया, जो लंबी अवधि के औसत से 0.67°C अधिक है। इससे भी ज्यादा चिंता की बात यह है कि अगस्त का औसत न्यूनतम तापमान यानी रात का तापमान भी 126 साल में सबसे अधिक रहा।
अगस्त 1901 में देश का औसत तापमान करीब 26.89°C दर्ज किया गया था। इसके बाद एक सदी से ज्यादा समय में तापमान में लगातार हुई बढ़ोतरी अब अगस्त के नए रिकॉर्ड में दिखाई दे रही है। इस बार लोगों को दिन की गर्मी के साथ रात में भी राहत नहीं मिली। उमस और अधिक न्यूनतम तापमान के कारण रात का तापमान नीचे नहीं उतर सका।

बारिश ने भी नहीं दिया साथ
गर्मी का यह रिकॉर्ड ऐसे समय बना है, जब देश का दक्षिण-पश्चिम मानसून भी कमजोर रहा है। जून से शुरू हुए मानसूनी मौसम में अब तक बारिश सामान्य से करीब 14 फीसदी कम हुई है। एक ओर तापमान लगातार बढ़ रहा है, दूसरी ओर बारिश में कमी बनी हुई है। मौसम का यह मेल कृषि और जल प्रबंधन दोनों के लिए चिंता बढ़ाने वाला है।
मानसून का असर पूरे देश में एक जैसा नहीं रहा। कुछ इलाकों में सामान्य से अधिक पानी बरसा तो कई क्षेत्र बारिश के लिए तरसते रहे। बिहार, आंध्र प्रदेश, पंजाब और पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में बारिश की भारी कमी दर्ज की गई। वहीं कई इलाकों में कम समय में मूसलाधार बारिश हुई। ऐसे में कुछ स्थानों पर बाढ़ जैसे हालात बने, जबकि दूसरे इलाकों में खेत पानी का इंतजार करते रहे।
सिर्फ बारिश की मात्रा से नहीं तय होती स्थिति
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक मानसून की स्थिति समझने के लिए केवल कुल बारिश का आंकड़ा पर्याप्त नहीं है। बारिश कब हुई और किन इलाकों में कितनी हुई, इसका भी बड़ा महत्व है। किसी क्षेत्र में कुछ घंटों या दिनों में अत्यधिक बारिश हो जाए और दूसरे इलाके में लंबे समय तक पानी न बरसे तो दोनों जगहों की स्थिति बिल्कुल अलग होगी। इस बार मानसून का असमान वितरण इसी तस्वीर को सामने ला रहा है।
सितंबर में भी राहत की उम्मीद कम
मानसून के अंतिम महीने सितंबर को लेकर भी मौसम विभाग का अनुमान चिंता कम करने वाला नहीं है। पूर्वानुमान के अनुसार सितंबर में देशभर में बारिश लंबी अवधि के औसत की 91 फीसदी से भी कम रह सकती है। इसके साथ ही अधिकतम और न्यूनतम दोनों तापमान सामान्य से ऊपर रहने की संभावना है। यानी मानसून की विदाई के बीच भी गर्मी और उमस से राहत मिलने के आसार कम हैं। यदि सितंबर में बारिश का आंकड़ा कमजोर रहता है तो इसका असर खेती पर पड़ सकता है। खासकर उन इलाकों में चिंता ज्यादा होगी, जहां अगस्त तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंचा है।
अल नीनो भी बना परेशानी की वजह
कमजोर मानसून के बीच अल नीनो की स्थिति ने भी चिंता बढ़ाई है। मौसम विभाग के अनुसार प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक होने से अल नीनो की स्थिति मजबूत हुई है। समुद्र के तापमान में होने वाला यह बदलाव दुनिया के कई हिस्सों के मौसम को प्रभावित करता है। भारत में अल नीनो का संबंध अक्सर कमजोर मानसून और कम बारिश से जोड़ा जाता है। हालांकि इसका असर हर साल समान नहीं होता, लेकिन इस बार मानसून की कमजोर स्थिति के बीच अल नीनो की भूमिका पर भी नजर है।
एक ही मौसम में बाढ़ और सूखे जैसे हालात
इस मानसून की सबसे बड़ी तस्वीर यह है कि देश में कुल बारिश सामान्य से कम होने के बावजूद कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश हुई। 31 अगस्त को भी मौसम विभाग ने कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की थी। यानी देश के एक हिस्से में पानी का दबाव बाढ़ की स्थिति पैदा कर रहा है, जबकि दूसरे हिस्से में बारिश की कमी खेतों और जलस्रोतों के लिए चिंता बनी हुई है। अगस्त का तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचना, मानसून का 14 फीसदी पीछे रहना और सितंबर में भी सामान्य से कम बारिश का अनुमान मौसम की बदलती तस्वीर की ओर इशारा कर रहा है। आने वाले दिनों में बारिश का वितरण और तापमान दोनों ही देश के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।