हनी ट्रैप मामले में आतंकवाद विरोधी दस्ते की दस्तक, सागर में दबिश देकर मुख्य मोबाइल जब्त

इंदौर। चर्चित हनी ट्रैप मामला अब एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच चुका है। इस हाई-प्रोफाइल मामले की परतें खोलने के लिए अब मध्य प्रदेश पुलिस की विशेष जांच दल के साथ-साथ आतंकवाद विरोधी दस्ते ने भी अपनी कार्रवाई का दायरा बढ़ा दिया है। खुफिया विभाग के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ए साईं मनोहर के सीधे निर्देशों के बाद आतंकवाद विरोधी दस्ते को इस तफ्तीश में शामिल किया गया है। दोनों ही सुरक्षा एजेंसियां मिलकर अब इस पूरे नेटवर्क के डिजिटल पदचिह्नों और कड़ियों को जोड़ने में जुट गई हैं।
संयुक्त टीम ने इस सिलसिले में सागर के मकरोनिया इलाके में स्थित रेशू चौधरी के आवास पर अचानक छापा मारा। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। टीम ने उस मुख्य मोबाइल फोन को अपने कब्जे में ले लिया है, जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर आपत्तिजनक तस्वीरें, वीडियो और अन्य गोपनीय सामग्रियां अलग-अलग रसूखदार लोगों को भेजने के लिए किया जा रहा था।

मिटाए डेटा को वापस पाने में जुटे साइबर विशेषज्ञ
इस बड़ी बरामदगी के बाद पुलिस उपायुक्त (अपराध) राजेश त्रिपाठी ने बताया कि तकनीकी और साइबर विशेषज्ञों की एक विशेष टीम इस जब्त मोबाइल फोन का बारीकी से अध्ययन कर रही है। विशेषज्ञ उस डेटा, संदेशों और तस्वीरों को दोबारा निकालने का प्रयास कर रहे हैं जिन्हें भेजने के बाद फोन से मिटा दिया गया था या आगे बढ़ा दिया गया था। जांच एजेंसियों का मुख्य ध्यान अब इस बात पर केंद्रित है कि रेशू ने इस संवेदनशील सामग्री को किन-किन लोगों के पास भेजा था और इस खेल के पीछे कौन से बड़े चेहरे शामिल हैं।
इस पड़ताल के दौरान रेशू के मित्र शुभम की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है। छानबीन में यह बात सामने आई है कि रेशू अक्सर शुभम के साथ इंदौर और भोपाल जैसे बड़े शहरों की यात्राएं करती थी। शुभम मुख्य रूप से खेती-किसानी के काम से जुड़ा हुआ है। पुलिस को यह गहरा अंदेशा है कि शुभम को रेशू की इन संदिग्ध गतिविधियों और योजनाओं की पूरी जानकारी थी। इस आशंका के आधार पर जांच दल ने शुभम को हिरासत में लेकर लंबी पूछताछ भी की है।

विदेशी धरती से नाता और पारिवारिक विवादों का इतिहास
जैसे-जैसे इस मामले की जांच आगे बढ़ रही है, मुख्य आरोपी रेशू चौधरी के जीवन से जुड़े कई चौंकाने वाले पहलू भी सामने आ रहे हैं। पुलिस को पता चला है कि रेशू ने ओमान की राजधानी मस्कट में रहकर अपनी पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद वर्ष 2018 में उसकी शादी छत्तीसगढ़ के रायपुर में रहने वाले महेंद्र नामक व्यक्ति से हुई थी। हालांकि, यह वैवाहिक रिश्ता ज्यादा दिनों तक टिक नहीं सका और महज 3 महीने के भीतर ही दोनों के रास्ते अलग हो गए।
विवाह टूटने के बाद रेशू ने रायपुर में अपने पति, सास और ससुर के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा भी दर्ज कराया था। इसके अलावा जांच में यह बात भी उजागर हुई है कि रेशू का भाई स्वयं पुलिस महकमे में सेवा दे रहा है। उसके पिता की मृत्यु के बाद उसे अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी मिली थी। पुलिस अब इन सभी पारिवारिक और पुराने कड़ियों को मौजूदा घटनाक्रम से जोड़कर देख रही है।

आरोपियों से पूछताछ कर ली गई
पुलिस उपायुक्त के अनुसार, इस मामले में पकड़े गए मुख्य चेहरों से शुरुआती दौर की पूछताछ का काम लगभग पूरा कर लिया गया है। घटना में इस्तेमाल की गई गाड़ी और मोबाइल फोन जैसे महत्वपूर्ण साक्ष्यों को पहले ही जब्त किया जा चुका है, जबकि कुछ अन्य संदिग्ध लोगों की भूमिका की गहराई से जांच की जा रही है।
पुलिस और जांच एजेंसियां ने इस मामले में नामजद सभी 7 आरोपियों श्वेता जैन, अलका दीक्षित, जयदीप दीक्षित, लाखन चौधरी, रेशू चौधरी, जितेंद्र पुरोहित और मुख्य आरक्षक विनोद शर्मा को न्यायालय के समक्ष पेश किया। माना जा रहा है कि मोबाइल से मिलने वाले डिजिटल दस्तावेजों और फॉरेंसिक रिपोर्ट के बाद आने वाले दिनों में कुछ और बड़े नामों का खुलासा हो सकता है।

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