पंजाब में 2027 के लिए कांग्रेस की तैयारी तेज, जनता से सुझाव लेकर बनेगा घोषणापत्र, राहुल गांधी के दौरे की तैयारी!

चंडीगढ़। पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी अब चुनावी घोषणापत्र को केवल नेताओं और संगठन की बैठकों तक सीमित रखने के बजाय जनता की राय से तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसके लिए घोषणा पत्र समिति पंजाब के अलग-अलग हिस्सों में जाएगी और युवाओं, किसानों, महिलाओं सहित विभिन्न सामाजिक वर्गों से उनकी समस्याओं और अपेक्षाओं पर बातचीत करेगी।
घोषणा पत्र समिति की पहली बैठक 21 अगस्त को हुई। फतेहगढ़ साहिब के सांसद अमर सिंह की अध्यक्षता वाली समिति में सांसद गुरजीत सिंह औजला और पूर्व विधायक हरदयाल सिंह कंबोज शामिल हैं। समिति आने वाले दिनों में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर लोगों से सीधे संवाद करेगी। कांग्रेस इसे जनभागीदारी से तैयार होने वाला घोषणा पत्र बनाने की कोशिश के तौर पर देख रही है।

घोषणा पत्र का फोकस युवा वोटर
युवाओं की बदलती जरूरतों पर कांग्रेस का खास ध्यान है। पार्टी खास तौर पर पहली बार मतदान करने वाले युवाओं को ध्यान में रखते हुए शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, रोजगार, कौशल विकास, मानसिक स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों को घोषणापत्र में शामिल करने पर विचार कर रही है। कांग्रेस की कोशिश है कि चुनावी वादे केवल पारंपरिक मुद्दों तक सीमित न रहें, बल्कि नई पीढ़ी की जरूरतों और अपेक्षाओं को भी जगह मिले।
इस बीच कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व की ओर से राहुल गांधी के पंजाब दौरे की तैयारी भी चल रही है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी सितंबर के पहले सप्ताह में पंजाब का दौरा कर सकते हैं। घोषणापत्र समिति की पहली बैठक भी उनके संभावित दौरे से ठीक पहले हुई है। ऐसे में उनके दौरे को राज्य में कांग्रेस के चुनावी अभियान को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

गुटबाजी भी बड़ी चुनौती
हालांकि, पंजाब कांग्रेस के सामने केवल जनता के बीच पकड़ मजबूत करने की चुनौती नहीं है। प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल को संगठन के भीतर चल रही गुटबाजी से भी निपटना है। हाल के दिनों में बघेल ने पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के खेमे से जुड़े नेताओं से मुलाकात कर उनकी नाराजगी दूर करने की कोशिश की है। चन्नी खेमा लंबे समय से पंजाब कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व में बदलाव की मांग करता रहा है। इसके बावजूद पार्टी हाईकमान ने फिलहाल अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद पर बनाए रखने का फैसला किया है। बघेल भी स्पष्ट कर चुके हैं कि फिलहाल प्रदेश नेतृत्व में बदलाव नहीं किया जाएगा।

राहुल गांधी के दौरे से निकलेगा हल
ऐसे में कांग्रेस के सामने 2027 के चुनाव से पहले दोहरी चुनौती है। एक और उसे जनता के बीच जाकर चुनावी मुद्दों और घोषणा पत्र के लिए समर्थन जुटाना है, वहीं दूसरी ओर पार्टी के भीतर अलग-अलग गुटों के बीच मतभेद कम करने हैं। सार्वजनिक तौर पर एकजुटता का संदेश देने की कोशिश जारी है, लेकिन नेतृत्व को लेकर असंतोष पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। राहुल गांधी का संभावित पंजाब दौरा इन दोनों मोर्चों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। एक तरफ पार्टी जनता से मिले सुझावों को चुनावी घोषणा पत्र का आधार बनाने की तैयारी कर रही है, तो दूसरी ओर केंद्रीय नेतृत्व की मौजूदगी से संगठन में एकजुटता का संदेश देने की कोशिश होगी। 2027 के विधानसभा चुनाव से काफी पहले कांग्रेस ने जिस तरह जनसंवाद और संगठन को साथ लेकर चलने की रणनीति अपनाई है, उससे पंजाब में उसका चुनावी अभियान धीरे-धीरे आकार लेता दिखाई दे रहा है।

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