नई व्यवस्था के बाद भोजशाला में विशेष पूजा-अर्चना की गई

गोमूत्र और गंगाजल से शुद्धि, गर्भगृह में स्थापित की गई अखंड ज्योत

     धार। ऐतिहासिक भोजशाला में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की नई व्यवस्था लागू होने के बाद रविवार को पहली बार विधि-विधान के साथ मां वाग्देवी की आराधना की गई। सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां वाग्देवी के चित्र लेकर भोजशाला पहुंचे और धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल हुए।

   भोज उत्सव समिति की ओर से सबसे पहले परिसर को गंगाजल और गोमूत्र से शुद्ध किया गया। इसके बाद गर्भगृह को रंगोली से सजाया गया। परिसर के बाहर स्थित ज्योति मंदिर की अखंड ज्योत को भी गर्भगृह में स्थापित किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार, देवी अनुष्ठान और वास्तु पूजन के बाद सुबह 11 बजकर 45 मिनट पर आरती संपन्न हुई।

हाईकोर्ट के निर्णय पर दिग्विजय सिंह ने उठाए सवाल
    भोजशाला को लेकर जारी विवाद के बीच कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह ने इंदौर में उच्च न्यायालय के फैसले पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि न्यायालय का आदेश पूरी तरह स्पष्ट नहीं था। उनके अनुसार भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित यह स्मारक पूजा स्थल की श्रेणी में नहीं आता और नियमों के अनुसार यहां नियमित पूजा-पाठ का कोई प्रावधान नहीं है।

    उनके बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भोज उत्सव समिति के सदस्य अशोक कुमार जैन ने कहा कि दिग्विजय सिंह के मुख्यमंत्री रहते हुए यहां पूजा पर रोक लगाई गई थी। उन्होंने कहा कि पहले प्रत्येक मंगलवार को यहां पूजा होती थी, लेकिन बाद में प्रतिबंध लगा दिया गया। जैन ने आरोप लगाया कि हिंदू पक्ष को केवल बसंत पंचमी पर पूजा की अनुमति दी गई, जबकि मुस्लिम पक्ष को नमाज की अनुमति मिलती रही।

गुंबद तक नहीं पहुंच सकीं केंद्रीय मंत्री
    आरती के बाद केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ध्वजारोहण के लिए भोजशाला के गुंबद की ओर बढ़ीं। हालांकि सुरक्षा कारणों से वहां कांटेदार तार लगाए गए थे, जिसके चलते उन्होंने सीढ़ियों के ऊपर बने द्वार पर ही ध्वज की पूजा-अर्चना कर ध्वजारोहण किया। सावित्री ठाकुर ने कहा कि किसी भी मंदिर के शिखर पर ध्वज लगाना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था के कारण उन्हें द्वार पर ही ध्वज स्थापित करना पड़ा। उन्होंने बताया कि शनिवार शाम को भी वह जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ यहां पहुंची थीं और पूजा-अर्चना की थी।

भोजशाला को पुराने वैभव के साथ संवारा जाएगा
    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पहले शुक्रवार के दिन यहां तनावपूर्ण स्थिति बनी रहती थी, लेकिन अब हालात सामान्य हैं और श्रद्धालु किसी भी समय दर्शन कर सकते हैं। इससे पहले मुख्यमंत्री ने भी कहा कि भोजशाला को उसके प्राचीन वैभव के अनुरूप विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में यहां ऐसी व्यवस्थाएं की जाएंगी, जिससे देश और प्रदेश से आने वाले श्रद्धालु सहज रूप से मां वाग्देवी के दर्शन कर सकें।

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