धार में प्रवेशोत्सव के बीच बड़ी लापरवाही, 12वीं पास करने के बाद 11,626 छात्र कॉलेज नहीं पहुंचे, 352 ने छोड़ी स्कूली पढ़ाई!

धार में प्रवेशोत्सव के बीच बड़ी लापरवाही, 12वीं पास करने के बाद 11,626 छात्र कॉलेज नहीं पहुंचे, 352 ने छोड़ी स्कूली पढ़ाई!

धार। जिले में एक तरफ जहां स्कूलों और कॉलेजों में प्रवेशोत्सव के कार्यक्रमों के साथ नए छात्रों का स्वागत किया जाता रहा है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय शिक्षा व्यवस्था की एक गंभीर सच्चाई उजागर हुई। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जिले के 11,626 छात्र-छात्राएं 12वीं की परीक्षा पास करने के बावजूद कॉलेज तक नहीं पहुंच सके। इसके अलावा 352 विद्यार्थियों ने स्कूल स्तर पर ही पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी। इस पूरी स्थिति में सबसे बड़ी बात यह है कि शिक्षा विभाग ने यह जानने का प्रयास तक नहीं किया कि इतनी बड़ी संख्या में युवा पढ़ाई से दूर क्यों हो गए।

शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के दावे कागजी, रिकॉर्ड होने के बाद भी विभाग बेखबर
राज्य सरकार पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों को दोबारा शिक्षा से जोड़ने के लिए अभियान चलाने की बात करती है और उच्च शिक्षा में दाखिला बढ़ाने के दावे किए जाते हैं। इसके उलट धार जिले में हजारों विद्यार्थियों का शैक्षणिक सफर 12वीं के बाद आगे नहीं बढ़ पाया। शिक्षा विभाग के पास इन सभी छात्रों का पूरा ब्योरा दर्ज है, लेकिन इसके बावजूद न तो उनकी खोजबीन की गई और ना ही उन्हें वापस पढ़ाई के लिए प्रेरित करने का कोई ठोस कदम उठाया गया। जिले में कुल 41,156 विद्यार्थी शिक्षा से दूर पाए गए हैं, जो आदिवासी बहुल धार जिले में शिक्षा व्यवस्था के दावों पर सवाल खड़े करता है।

उच्च शिक्षा से दूरी में धार विकासखंड आगे, तिरला में सबसे कम मामले
12वीं के बाद आगे की पढ़ाई रोकने वाले विद्यार्थियों में धार विकासखंड की स्थिति सबसे खराब है, जहां 1,984 युवा कॉलेज नहीं जा सके। इस सूची में सरदारपुर 1,769 छात्रों के साथ दूसरे और नालछा 1,662 छात्रों के साथ तीसरे स्थान पर है। इसके अतिरिक्त बदनावर में 1,496, धरमपुरी में 1,278, कुक्षी में 715, मनावर में 629, गंधवानी में 484, उमरबन में 423, निसरपुर में 369, बाग में 348 और डही में 340 छात्र उच्च शिक्षा से बाहर रह गए। सबसे कम 129 छात्र तिरला ब्लॉक में दर्ज किए गए।

स्कूली पढ़ाई छोड़ने वाले छात्रों में भी धार शीर्ष पर, आर्थिक तंगी बड़ी वजह
स्कूल ड्रॉपआउट यानी बीच में पढ़ाई छोड़ने वाले 352 विद्यार्थियों की बात करें तो इसमें भी धार विकासखंड 105 छात्रों के साथ सबसे आगे है। इसके बाद कुक्षी में 78, उमरबन में 39, मनावर में 36 और सरदारपुर में 27 बच्चों ने स्कूल जाना बंद कर दिया। शिक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्रों में गरीबी, मजदूरी की मजबूरी, पारिवारिक जिम्मेदारियां और रोजगार की तलाश में पलायन जैसे कारण बच्चों को पढ़ाई से दूर कर रहे हैं। हालांकि, इन समस्याओं की पहचान करके छात्रों को वापस स्कूल या कॉलेज तक लाना विभाग का दायित्व था, जिसमें स्पष्ट ढिलाई नजर आ रही है।

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