हाईकोर्ट ने कहा, लोक सेवकों के खिलाफ कार्रवाई से पहले आरोपों की पुष्टि जरूरी
नैनीताल। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) अधिनियम के तहत सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ दर्ज होने वाले मामलों को लेकर नैनीताल हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसी भी लोक सेवक के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करने से पहले प्रशासनिक जांच कराना अनिवार्य होगा। बिना जांच रिपोर्ट और आरोपों की पुष्टि के सीधे आपराधिक कार्रवाई नहीं की जा सकती।
यह फैसला जस्टिस आलोक मेहरा की एकलपीठ ने तत्कालीन पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) भूपेंद्र धोनी और उपनिरीक्षक (एसआई) रमेश बोहरा की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुनाया। मामला हल्द्वानी के मुखानी थाना क्षेत्र से संबंधित है।
स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि संबंधित सत्र न्यायालय ने प्रशासनिक जांच रिपोर्ट के अभाव में लोक सेवकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का निर्देश देकर स्थापित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया। अदालत ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों में निर्धारित सिद्धांतों का भी उल्लेख किया और कहा कि सरकारी अधिकारियों के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई से पहले प्रशासनिक स्तर पर आरोपों की जांच और उनकी पुष्टि आवश्यक है।
अदालत ने इसी आधार पर सत्र न्यायालय के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे। हाईकोर्ट का मानना था कि प्रशासनिक जांच की प्रक्रिया पूरी किए बिना इस प्रकार का आदेश देना विधिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है।
यह था प्रकरण जिसमें मामला दर्ज हुआ
मामले की पृष्ठभूमि वर्ष 2024 से जुड़ी है। उस समय नैनीताल की जिला एवं सत्र अदालत ने एक महिला द्वारा दायर परिवाद पर सुनवाई करते हुए एक आरोपी युवक के साथ-साथ तत्कालीन सीओ और एसओ के खिलाफ भी एससी/एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया था।
महिला ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 156(3) के तहत दाखिल अपनी अर्जी में आरोप लगाया था कि उसके साथ जातिसूचक टिप्पणियां की गईं, दुर्व्यवहार किया गया और मारपीट की गई। हालांकि पुलिस द्वारा की गई जांच में इन आरोपों की पुष्टि नहीं हुई थी, जिसके कारण संबंधित प्रकरण में मुकदमा दर्ज नहीं किया गया था।
मुकदमे से पहले प्रशासनिक जांच की जाए
सत्र न्यायालय के आदेश से असहमत होते हुए तत्कालीन सीओ भूपेंद्र धोनी और एसआई रमेश बोहरा ने नैनीताल हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि भविष्य में किसी भी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करने से पहले प्रशासनिक जांच कराना और उसमें आरोपों की पुष्टि होना आवश्यक होगा।
हाईकोर्ट के इस फैसले को लोक सेवकों के विरुद्ध दर्ज होने वाले मामलों में प्रक्रिया संबंधी स्पष्टता प्रदान करने वाला महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि किसी भी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई निर्धारित कानूनी मानकों और जांच प्रक्रिया के आधार पर ही की जाए।