ईडब्ल्यूएस आरक्षण, सुप्रीम कोर्ट ने ₹8 लाख आय सीमा को प्रथम दृष्टया सही बताया, अंतिम फैसला बाकी

नई दिल्ली। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) को सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में मिलने वाले आरक्षण के लिए निर्धारित 8 लाख रुपये वार्षिक पारिवारिक आय सीमा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण मौखिक टिप्पणी की है। शीर्ष अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह आय सीमा उचित और तर्कसंगत दिखाई देती है। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस संबंध में अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है और मामले की सुनवाई जारी रहेगी।
यह मामला वर्ष 2021 में दायर उस याचिका से जुड़ा है, जिसमें नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की अधिसूचना को चुनौती दी गई थी। अधिसूचना के अनुसार मेडिकल पाठ्यक्रमों के ऑल इंडिया कोटा में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27 प्रतिशत तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) को 10 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान किया गया था। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि वर्ष 2022 में सुप्रीम कोर्ट पहले ही 103वें संविधान संशोधन के माध्यम से ईडब्ल्यूएस आरक्षण की संवैधानिक वैधता को स्वीकार कर चुका है, लेकिन आरक्षण के लिए तय 8 लाख रुपये की आय सीमा को लेकर उठे सवालों पर अभी अंतिम निर्णय शेष है। यह विवाद पिछले लगभग 5 वर्षों से न्यायालय के समक्ष लंबित है।

आय सीमा का कानूनी मुद्दा आज भी प्रासंगिक
सुनवाई के दौरान पीठ ने यह भी कहा कि मामला वर्ष 2021 की नीट प्रवेश प्रक्रिया से संबंधित है, इसलिए उसका मूल विवाद अब समाप्त हो चुका है। इस पर याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता तनवी दुबे ने दलील दी कि केवल ‘नीट’ प्रवेश का प्रश्न समाप्त हुआ है, लेकिन 8 लाख रुपये की आय सीमा का कानूनी मुद्दा आज भी प्रासंगिक बना हुआ है और उस पर निर्णय आवश्यक है।

5 एकड़ से अधिक कृषि भूमि की सीमा
अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि केंद्र सरकार द्वारा गठित पांडे समिति ने 8 लाख रुपये की वार्षिक आय सीमा को यथावत रखने की सिफारिश की थी। साथ ही समिति ने यह भी सुझाव दिया था कि जिन परिवारों के पास 5 एकड़ से अधिक कृषि भूमि हो, उन्हें ईडब्ल्यूएस आरक्षण के दायरे से बाहर रखा जाए। केंद्र सरकार ने दिसंबर 2021 में अदालत को बताया था कि उसने समिति की इन सिफारिशों को स्वीकार कर लिया है।

आय सीमा उचित प्रतीत
मामले के रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद जस्टिस आलोक अराधे ने कहा कि पहली नजर में 8 लाख रुपये की आय सीमा उचित प्रतीत होती है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह केवल प्रारंभिक टिप्पणी है और अंतिम निष्कर्ष विस्तृत सुनवाई के बाद ही निकाला जाएगा।

विस्तार से सुनवाई फिलहाल स्थगित
वरिष्ठ अधिवक्ताओं की अनुपस्थिति के कारण पीठ ने मामले पर विस्तार से सुनवाई फिलहाल स्थगित कर दी। अदालत ने याचिकाकर्ता के वकील को सभी कानूनी बिंदुओं की सूची तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से भी अगली सुनवाई में सहयोग करने को कहा गया है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद निर्धारित करते हुए स्पष्ट किया कि 8 लाख रुपये की आय सीमा की वैधता पर अंतिम फैसला सभी लंबित याचिकाओं पर सुनवाई पूरी होने के बाद ही दिया जाएगा।

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