इंदौर मेट्रो के साथ बदलेगा शहर का विकास मॉडल, 31.32 किमी कॉरिडोर पर विकसित होंगे 4 टीओडी क्लस्टर

इंदौर। शहर में मेट्रो परियोजना केवल सार्वजनिक परिवहन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसके साथ शहरी विकास का नया स्वरूप भी तैयार किया जाएगा। 31.32 किलोमीटर लंबे मेट्रो कॉरिडोर के दोनों ओर 500-500 मीटर क्षेत्र में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) की योजना लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है। इस योजना के तहत मेट्रो स्टेशनों के आसपास आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा देते हुए उच्च घनत्व वाला सुव्यवस्थित विकास किया जाएगा।
प्रस्ताव के अनुसार मेट्रो के दो से तीन स्टेशनों को मिलाकर चार प्रमुख क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। इन क्षेत्रों में बहुमंजिला और गगनचुंबी इमारतों को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे रहवासी और व्यावसायिक उपयोग का संतुलित विस्तार हो सकेगा। इसके साथ ही सार्वजनिक परिवहन आधारित शहरी विकास को गति देने का लक्ष्य रखा गया है।

‘शहरी गतिशीलता एवं ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट’ विषय पर कार्यक्रम
इस विषय पर शहर के एक निजी होटल में इंस्टीट्यूट ऑफ टाउन प्लानर्स, इंडिया (आईटीपीआई) रीजनल सेंटर की ओर से ‘शहरी गतिशीलता एवं ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट’ विषय पर विशेष संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने इंदौर में टीओडी की संभावनाओं और इसके क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा की। बताया गया कि मेट्रो रूट के दो से तीन स्टेशनों को एक इकाई मानकर संबंधित क्षेत्र का समग्र विकास किया जाएगा।
योजना को अंतिम रूप देने से पहले निर्धारित एजेंसी अरुप शहरवासियों, शहरी नियोजन विशेषज्ञों और सिटी प्लानर्स से सुझाव प्राप्त करेगी। इन सुझावों के आधार पर टीओडी कॉरिडोर की रूपरेखा तैयार की जाएगी, ताकि विकास स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप हो।
आईटीपीआई इंदौर रीजनल सेंटर की सचिव प्रकृति सेठी और चेयरमैन डीएल गोयल ने कहा कि टीओडी योजना का शहर के नए मास्टर प्लान और तैयार हो रहे रीजनल प्लान के साथ समन्वय आवश्यक होगा। यदि जरूरत महसूस हुई तो टीओडी के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संबंधित अधिनियम में संशोधन करने पर भी विचार किया जाएगा। साथ ही एरिया डेवलपमेंट प्लान के अंतर्गत विकास संबंधी आवश्यक स्वतंत्रता देने की संभावना भी देखी जाएगी।

क्लस्टर विकास की योजना
पहले चरण में एयरपोर्ट-गांधी नगर, आईएसबीटी-चंद्रगुप्त चौराहा, राजवाड़ा (नगर निगम)-रीगल तथा एससी-4 और एससी-3 मेट्रो स्टेशनों के आसपास चार प्रमुख क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। इन क्षेत्रों को मेट्रो आधारित विकास के मॉडल के रूप में तैयार किया जाएगा।
टीओडी योजना के अंतर्गत मेट्रो कॉरिडोर से जुड़े क्षेत्रों में अधूरी सड़क कनेक्टिविटी पूरी की जाएगी। हरित क्षेत्रों का विस्तार और संरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा, जबकि खाली और अनुपयोगी भूमि का सुनियोजित उपयोग कर नए विकास कार्य किए जाएंगे। मेट्रो को सिटी बस, ई-रिक्शा, ऑटो रिक्शा, साइकिल और अन्य परिवहन सुविधाओं से जोड़कर बहु-माध्यमीय परिवहन व्यवस्था विकसित की जाएगी। इसके साथ ही ऊर्ध्वाधर विकास को बढ़ावा देते हुए बहुमंजिला आवासीय और व्यावसायिक भवनों के निर्माण को प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे मेट्रो कॉरिडोर के आसपास का पूरा क्षेत्र आधुनिक शहरी स्वरूप में विकसित हो सके।

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