इंदौर की अनिका के इलाज की कानूनी जंग, हाईकोर्ट से जागी उम्मीद, क्राउडफंडिंग से जुट चुके हैं करीब ₹8 करोड़

इंदौर। यहां की साढ़े तीन साल की मासूम अनिका एक बेहद दुर्लभ और गंभीर जेनेटिक बीमारी ‘स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी’ (एसएमए) टाइप-2 से संघर्ष कर रही है। अनिका के जीवन को सुरक्षित करने के लिए एक बेहद कीमती इंजेक्शन की आवश्यकता है, जिसकी लागत लगभग 9.55 करोड़ रुपए आंकी गई है। इस बड़ी धनराशि को जुटाने के लिए बच्ची के परिजन और विभिन्न सामाजिक संगठन बीते कई महीनों से लगातार प्रयासरत हैं।
इस मामले में विधिक सहायता प्रदान करते हुए अधिवक्ता चंचल गुप्ता और अधिवक्ता लखन शर्मा के माध्यम से मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में एक याचिका प्रस्तुत की गई है। 11 अगस्त को हुई सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने इस प्रकरण की संवेदनशीलता को समझा और प्रशासनिक तंत्र को मौजूदा नियमों से आगे बढ़कर सहयोग करने का संदेश दिया।

राष्ट्रीय नीति की तय सीमा और क्राउडफंडिंग का सहयोग
अदालत में सुनवाई के दौरान ‘एम्स’ की तरफ से पक्ष रखते हुए बताया गया कि केंद्र सरकार की दुर्लभ बीमारियों से जुड़ी स्वास्थ्य योजना के तहत अधिकतम 50 लाख रुपये तक का वित्तीय अनुदान देने का प्रावधान है। यदि बच्ची का उपचार शुरू होता है, तो केंद्र सरकार यह राशि स्वीकृत करने को तैयार है।
दूसरी तरफ, याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं ने पीठ को अवगत कराया कि विभिन्न गैर-सरकारी संस्थाओं, सामाजिक समूहों और आम लोगों की मदद से क्राउडफंडिंग अभियानों के जरिये अब तक करीब 8 करोड़ रुपए की राशि एकत्र की जा चुकी है। यह पूरी धनराशि फिलहाल सहयोग करने वाली संस्थाओं के पास सुरक्षित रखी है।

असामान्य परिस्थितियों में खोजें विशेष समाधान
हाई कोर्ट की इंदौर पीठ ने अनिका के मामले को एक असाधारण स्थिति मानते हुए सरकार को निर्देश दिए कि वह तय सीमा से ऊपर जाकर अतिरिक्त आर्थिक सहायता प्रदान करने की संभावनाओं पर विचार करे। इसके साथ ही राज्य सरकार के स्तर पर भी वित्तीय मदद के अन्य विकल्प तलाशने का मार्ग खुला रखा गया है।
एडवोकेट चंचल गुप्ता के अनुसार, अदालत ने निर्देश जारी किया है कि आगामी सुनवाई से पूर्व उन सभी संस्थाओं की सूची और सहमति पत्र प्रस्तुत किए जाएं, जिन्होंने यह फंड जुटाया है। इन संस्थाओं को यह हलफनामा भी देना होगा कि दवा निर्माता कंपनी नोवार्टिस का इनवॉइस जारी होते ही वे जमा राशि को तुरंत एम्स के खाते में स्थानांतरित कर देंगे।

18 अगस्त को अगली महत्वपूर्ण सुनवाई
इलाज का कुल खर्च 9.55 करोड़ रुपये है, जिसमें से करीब 8 करोड़ रुपये जनसहयोग से और 50 लाख रुपये केंद्र सरकार से मिलने की उम्मीद है। ऐसे में अब शेष बची धनराशि की व्यवस्था करना ही सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। हाईकोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को करेगा, जहां एकत्रित फंड, संस्थाओं की लिखित सहमति और बाकी बची रकम के प्रबंध की समीक्षा की जाएगी। मासूम के जीवन और करोड़ों की इस चुनौती के बीच न्यायपालिका का यह कदम परिजनों के लिए एक बड़ी राहत बनकर सामने आया है।

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