आर्थिक संकट के बीच MP Govt. को खजाना मिला, MP के 1.28 लाख बंद खातों में ₹244 करोड़ मिले

आर्थिक संकट के बीच MP Govt. को खजाना मिला, MP के 1.28 लाख बंद खातों में ₹244 करोड़ मिले

आर्थिक संकट में MP Govt. को बड़ी राहत: 1.28 लाख बंद खातों में ₹244 करोड़ मिले

भोपाल। वित्तीय दबाव झेल रही MP Govt. को बजट समीक्षा के दौरान अप्रत्याशित राहत मिली है। राज्य के विभिन्न बैंकों में वर्षों से निष्क्रिय पड़े 1.28 लाख सरकारी खातों में कुल 244.76 करोड़ रुपए जमा पाए गए हैं। इन खातों में एक दशक से अधिक समय से कोई लेन-देन नहीं हुआ था। अब वित्त विभाग ने इस राशि को वापस लाने की प्रक्रिया तेज कर दी है।

स्क्रूटनी में खुला राज

वार्षिक बजट को अंतिम रूप देते समय वित्त विभाग ने जब खातों की व्यापक समीक्षा की, तब यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। इनमें से एक खाता जनजातीय कल्याण योजनाओं से जुड़ा था, जिसमें राशि तो ट्रांसफर की गई, लेकिन उसका उपयोग नहीं हुआ। धीरे-धीरे वह खाता अधिकारियों की निगाह से ओझल हो गया और वर्षों तक निष्क्रिय पड़ा रहा। इसी तरह के हजारों डॉर्मेंट खातों में कुल मिलाकर 244.76 करोड़ रुपए फंसे मिले। रकम का आकार देखते ही प्रशासन हरकत में आया।

आरबीआई से वापसी की प्रक्रिया शुरू

ये खाते लंबे समय से निष्क्रिय थे, इसलिए नियमों के तहत राशि को अनक्लेम्ड डिपॉजिट की श्रेणी में रखा गया था और इसका संरक्षक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया बन गया। आरबीआई के प्रावधानों के अनुसार, 10 वर्ष या उससे अधिक समय तक बिना दावे की रकम को डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड में स्थानांतरित कर दिया जाता है। हालांकि, मूल स्वामित्व संबंधित राज्य सरकार का ही रहता है और निर्धारित प्रक्रिया अपनाकर यह राशि वापस ली जा सकती है। अब वित्त विभाग ने आरबीआई से समन्वय कर फंड की रिकवरी की औपचारिक कवायद शुरू कर दी है।

तीन चरणों में क्लेम, तय हुई समय-सीमा

वित्त विभाग ने सभी जिलों के कलेक्टर और ट्रेजरी अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। रिकवरी के लिए तीन चरणों का शेड्यूल बनाया गया है।

– सबसे अधिक बैलेंस वाले शीर्ष 50 खाते : 25 फरवरी तक।

– अगले 50 खाते : 5 मार्च तक।

– शेष खाते : 10 मार्च तक।

हर क्लेम से पहले संबंधित खाते का री-केवाईसी और सत्यापन अनिवार्य होगा। वसूली गई राशि को राज्य के कंसोलिडेटेड फंड में जमा किया जाएगा।

अधिकारियों की प्रतिक्रिया

वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव मनीष रस्तोगी के अनुसार, खातों की जानकारी मिलते ही विशेष अभियान शुरू किया गया है। जिला स्तर पर सत्यापन कर नियमानुसार दावा प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, सभी बैंकों और शाखाओं को भी सूचित किया गया है कि राज्य के डॉर्मेंट सरकारी खातों का विवरण उपलब्ध कराया जाए।

ट्रैकिंग सिस्टम पर उठे सवाल

इस पूरे घटनाक्रम ने सरकारी फंड ट्रैकिंग प्रणाली की कमजोरियों को उजागर किया है। इतने वर्षों तक बड़ी राशि का निष्क्रिय रहना यह संकेत देता है कि मॉनिटरिंग में खामियां थीं। अब दैनिक निगरानी की व्यवस्था लागू की गई है। कलेक्टर स्तर पर नियमित समीक्षा होगी और वित्त विभाग को प्रतिदिन समेकित रिपोर्ट भेजी जाएगी।

सरकार को मिल सकती है बड़ी राहत

आर्थिक तंगी के दौर में 244.76 करोड़ रुपए की वापसी राज्य सरकार के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है। विशेष रूप से सामाजिक और जनजातीय कल्याण योजनाओं के लिए यह राशि महत्वपूर्ण सहारा बन सकती है। बजट संतुलन की चुनौती के बीच भूले-बिसरे खातों से निकली यह रकम सरकार के लिए किसी छिपे खजाने से कम नहीं है।

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