‘आप’ में दरार की आहट, राघव चड्ढा से दूरी क्यों बढ़ी, जानिए अंदर की 5 बड़ी वजह

‘आप’ में दरार की आहट, राघव चड्ढा से दूरी क्यों बढ़ी, जानिए अंदर की 5 बड़ी वजह

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के प्रमुख चेहरों में गिने जाने वाले राघव चड्ढा को राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से हटाए जाने के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। जो नेता कभी पार्टी नेतृत्व के बेहद करीबी माने जाते थे, उनके नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के प्रमुख चेहरों में गिने जाने वाले राघव चड्ढा को राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से हटाए जाने के बाद सियासी हलकों में हलचल तेज हो गई है। जो नेता कभी पार्टी नेतृत्व के बेहद करीबी माने जाते थे, उनके खिलाफ अचानक यह सख्त कदम क्यों उठाया गया। इस पर कई तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं। समझते हैं उन पांच अहम कारणों को, जिनकी वजह से पार्टी और चड्ढा के बीच दूरी बढ़ती नजर आ रही है।

  1. संजय सिंह की गिरफ्तारी के बाद बढ़ी सक्रियता
    पार्टी के भीतर यह चर्चा है कि अक्टूबर 2023 में संजय सिंह की गिरफ्तारी के बाद, जब वे जेल में थे, तब राघव चड्ढा ने राज्यसभा में अपनी भूमिका मजबूत करने की कोशिशें तेज कर दी थीं। कुछ नेताओं का मानना है कि उन्होंने खुद को आगे बढ़ाने के लिए मौके का फायदा उठाने की कोशिश की।
  2. राज्यसभा नेतृत्व को लेकर अंदरूनी खींचतान
    बताया जा रहा है कि चड्ढा ने राज्यसभा में पार्टी का नेता बनने के लिए पर्दे के पीछे रणनीति बनाई। हालांकि यह प्रयास सफल नहीं हुआ, जिसके बाद उनका ध्यान पंजाब की राजनीति की ओर अधिक जाता दिखा।
  3. पंजाब में हस्तक्षेप के आरोप
    पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं का आरोप है कि पंजाब में रहते हुए चड्ढा ने दिल्ली नेतृत्व से अपनी नजदीकियों का हवाला देकर वहां के प्रशासनिक मामलों में दखल देने की कोशिश की। इससे स्थानीय नेताओं में असहजता बढ़ी।
  4. महत्वपूर्ण प्रस्ताव से दूरी
    हाल ही में एक बड़े राजनीतिक मुद्दे पर विपक्ष द्वारा लाए गए प्रस्ताव पर हस्ताक्षर न करने को भी पार्टी ने गंभीरता से लिया। पार्टी का मानना है कि राष्ट्रीय स्तर के अहम मुद्दों पर एकजुटता जरूरी होती है, और इस मामले में चड्ढा का रुख अलग नजर आया।
  5. पंजाब और अन्य राज्यों के मुद्दों पर चुप्पी
    चड्ढा पंजाब से राज्यसभा सांसद हैं, लेकिन आरोप है कि उन्होंने वहां से जुड़े कई अहम मुद्दों को सदन में पर्याप्त मजबूती से नहीं उठाया। इसके अलावा अन्य राज्यों में पार्टी कार्यकर्ताओं पर हुई कार्रवाई पर भी उनकी चुप्पी सवालों के घेरे में रही।

इन तमाम कारणों ने मिलकर पार्टी और राघव चड्ढा के रिश्तों में खटास पैदा कर दी है। हालांकि आधिकारिक तौर पर पार्टी ने सीमित बयान ही दिया है, लेकिन अंदरखाने चल रही हलचल यह संकेत दे रही है कि आने वाले समय में यह मामला और दिलचस्प मोड़ ले सकता है।

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