अल नीनो का डराता साया, मध्य प्रदेश में मानसून की रफ्तार थमी, 16 जिलों पर सूखे का संकट

भोपाल। इस साल देशभर में अल नीनो के असर के कारण मानसून की चाल सुस्त पड़ गई है। इसका सबसे बड़ा खामियाजा मध्य प्रदेश को भुगतना पड़ रहा है, जहां आमतौर पर जून के दूसरे सप्ताह तक दस्तक देने वाला मानसून अब तक पूरी तरह सक्रिय नहीं हो सका है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के मुताबिक, सूबे के लोगों को मानसूनी बारिश के लिए अभी कुछ और दिनों का इंतजार करना होगा। इसी बीच मौसम वैज्ञानिकों ने एक बड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अल नीनो के चलते राज्य के कई इलाकों में सूखे जैसे गंभीर हालात पैदा हो सकते हैं।

मानसून की पिछड़ी, 22 दिन बाद भी रफ्तार कमजोर
आमतौर पर मध्य प्रदेश के आसमान में 15 जून के आसपास मानसूनी बादल उमड़ने लगते हैं, लेकिन इस बार 22 जून बीत जाने के बाद भी इसकी मजबूत एंट्री देखने को नहीं मिली है। देश की मुख्य भूमि पर मानसून को पहुंचे करीब 20 दिन का लंबा समय हो चुका है, मगर मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में इसकी प्रगति बेहद कमजोर बनी हुई है। मौसम के जानकारों का साफ कहना है कि इस सुस्ती के पीछे अल नीनो का प्रभाव है, जिसने मानसूनी हवाओं के चक्र को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है।

सूखे की आहट से बढ़ी दिल्ली की चिंता
राज्य के कम से कम 16 जिले इस समय सूखे के सीधे निशाने पर आ गए हैं। मानसून में इस बड़ी देरी का सबसे बुरा असर ग्रामीण जनजीवन और खेती पर पड़ने की आशंका है। बिगड़ते हालात को देखते हुए केंद्र सरकार पूरी स्थिति पर बारीक नजर रख रही है और राज्य प्रशासन के साथ लगातार संपर्क में है। सूत्रों का कहना है कि जनता के बीच किसी भी तरह की घबराहट या अफरातफरी को रोकने के लिए सरकार और मौसम विभाग ने प्रभावित होने वाले सभी जिलों की सूची को अभी पूरी तरह सार्वजनिक नहीं किया है। हालांकि, जो शुरुआती जानकारी मिली है उसके अनुसार धार, झाबुआ, बड़वानी, नीमच, रतलाम, दतिया, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, शिवपुरी, मंडला, सतना, बैतूल, छिंदवाड़ा और खंडवा जैसे क्षेत्रों पर संकट के गहरे बादल मंडरा रहे हैं।

संकट से निपटने के लिए सरकार की तैयारी
इस आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक अहम बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि मानसून की बेरुखी और बारिश के लंबे अंतर से निपटने के लिए एक विशेष आकस्मिक योजना तैयार की जा रही है। इस योजना के तहत राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ मिलकर किसानों को कम पानी में तैयार होने वाली और वैकल्पिक फसलों की बुआई करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि आने वाले दिनों में भी मानसून का व्यवहार सामान्य नहीं रहता है, तो किसानों को पारंपरिक खेती छोड़कर ऐसी फसलों का रुख करना होगा जो कम नमी में भी बेहतर उत्पादन दे सकें।

29 जून तक मिल सकती है राहत, मौसम विभाग ने रिपोर्ट सौंपी
मौसम विज्ञान केंद्र मध्य प्रदेश के प्रमुख अजय कुमार सिंह ने आने वाले दिनों के अनुमान को लेकर बताया कि सूबे में मानसून के पैर पसारने में अभी थोड़ा और वक्त लगेगा। मौजूदा मौसमी चक्र को देखते हुए उम्मीद जताई जा रही है कि 29 जून के आसपास राज्य में मानसून सक्रिय हो सकता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि अल नीनो का यह मारक असर सिर्फ मध्य प्रदेश तक ही सीमित नहीं है, बल्कि देश के कई अन्य हिस्सों में भी ऐसी ही स्थिति बनी हुई है। मौसम विभाग ने मौजूदा हालात और भविष्य के अनुमानों को लेकर अपनी विस्तृत रिपोर्ट केंद्र व राज्य सरकार को भेज दी है।

कृषि अर्थव्यवस्था के लिए खतरा, बुआई का समय निकला
मध्य प्रदेश की पूरी अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से खेती-किसानी के इर्द-गिर्द घूमती है, इसलिए बारिश का यह लंबा इंतजार ग्रामीण इलाकों में मायूसी ला रहा है। खरीफ की फसलों की बुआई का जो सबसे अनुकूल समय होता है, वह धीरे-धीरे हाथ से निकलता जा रहा है। पर्याप्त पानी न मिलने से खेत सूखे पड़े हैं और मिट्टी की नमी गायब हो रही है। सूबे का किसान पहले भी कई तरह की प्राकृतिक आपदाओं और चुनौतियों से जूझता रहा है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियां बेहद नाजुक नजर आ रही हैं। यदि अगले एक सप्ताह के भीतर अच्छी बारिश नहीं होती है, तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा, जिससे सीधे तौर पर राज्य के कृषि उत्पादन और बाजार पर बुरा असर पड़ेगा।

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