एक्स्ट्रा टाइम में फेरान टोरेस का जादुई गोल
न्यूयॉर्क। मेटलाइफ स्टेडियम में खेले गए बेहद रोमांचक फाइनल मुकाबले में स्पेन ने अर्जेंटीना को एक्स्ट्रा टाइम में 1-0 से मात देकर दूसरी बार फीफा वर्ल्ड कप की चमचमाती ट्रॉफी अपने नाम कर ली है। पूरे मैच के दौरान स्पेनिश टीम ने गेंद पर अपना दबदबा कायम रखा और विरोधी खेमे पर लगातार हमले बोले। हालांकि, अर्जेंटीना की मजबूत रक्षापंक्ति और उनके स्टार गोलकीपर एमिलियानो मार्टिनेज स्पेन के आक्रामक इरादों के सामने दीवार बनकर खड़े रहे। मार्टिनेज ने कई बेहतरीन सेव करके एक लंबे समय तक स्पेन को बढ़त हासिल करने से रोके रखा।
अर्जेंटीना को 10 खिलाड़ियों के साथ खेलना पड़ा
इस महामुकाबले का सबसे बड़ा और निर्णायक मोड़ रेगुलर टाइम के स्टॉपेज टाइम में देखने को मिला। अर्जेंटीना के मिडफील्डर एंजो फर्नांडीज ने स्पेन के पाउ कुबारसी पर एक खतरनाक टैकल किया, जिसके बाद रेफरी ने उन्हें मैच का दूसरा पीला कार्ड दिखा दिया। इस रेड कार्ड की वजह से अर्जेंटीना को बाकी का खेल 10 खिलाड़ियों के साथ ही खेलना पड़ा। स्पेन ने प्रतिद्वंद्वी टीम के कमजोर पड़ते ही इस मौके का पूरा फायदा एक्स्ट्रा टाइम में उठाया।
निको विलियम्स से मिले पास को गोल में बदला
आखिरकार एक्स्ट्रा टाइम के दूसरे हाफ की शुरुआत में स्पेन के फैंस झूम उठे। सब्स्टीट्यूट खिलाड़ी के तौर पर मैदान में उतरे फेरान टोरेस ने निको विलियम्स से मिले शानदार नॉक-बैक पास को बेहद सटीकता के साथ गोल पोस्ट में डाल दिया। यह इकलौता गोल मैच का निर्णायक फैसला साबित हुआ। कोच लुइस डे ला फुएंते के मार्गदर्शन में स्पेनिश टीम ने पूरे टूर्नामेंट में कमाल का पजेशन फुटबॉल खेला और विरोधी टीमों को बैकफुट पर रखा। स्पेन की खिताबी जीत की ताकत उनका डिफेंस रहा, जिसने पूरे टूर्नामेंट के 7 मैचों में विपक्षी टीमों को सिर्फ 1 गोल करने का मौका दिया।
पूरे टूर्नामेंट में अर्जेंटीना का जुझारूपन दिखा
दूसरी तरफ, महान खिलाड़ी लियोनेल मेस्सी की कप्तानी में अर्जेंटीना ने भी इस पूरे सफर में गजब का जुझारूपन दिखाया। नॉकआउट स्टेज में टीम ने मिस्र के खिलाफ पिछड़ने के बाद शानदार वापसी की थी, तो वहीं सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ 1 गोल से पीछे होने के बावजूद मुकाबला जीतकर फाइनल का टिकट कटाया था। मगर फाइनल मैच में रेड कार्ड की मार और स्पेन के अनुशासित खेल के कारण डिफेंडिंग चैंपियन अर्जेंटीना अपना खिताब बचाने में नाकाम रही।
अभी तक के वर्ल्ड कप फाइनल मुकाबलों का स्कोर
शीर्ष फुटबॉल टूर्नामेंट के इतिहास पर नजर डालें तो अब तक हुए सभी वर्ल्ड कप फाइनल मुकाबलों के परिणाम कुछ इस तरह रहे हैं। शुरुआत 1930 में हुई जहां उरुग्वे ने अर्जेंटीना को 4-2 से मात दी। इसके बाद 1934 में इटली ने चेकोस्लोवाकिया को 2-1 से और 1938 में हंगरी को 4-2 से हराकर लगातार दो खिताब जीते। 1950 के ऐतिहासिक मैच में उरुग्वे ने ब्राजील को 2-1 से हराया, जिसके बाद ब्राजील का सुनहरा दौर शुरू हुआ। ब्राजील ने 1958 में स्वीडन को 5-2 से और 1962 में चेकोस्लोवाकिया को 3-1 से पराजित किया। बीच में 1966 का खिताब इंग्लैंड ने वेस्ट जर्मनी को 4-2 से हराकर जीता, लेकिन 1970 में ब्राजील ने फिर वापसी करते हुए इटली को 4-1 से रौंदा।
हर फाइनल मुकाबला कड़ा हुआ
अगले कुछ दशकों में कड़ी टक्कर देखने को मिली जब 1974 में वेस्ट जर्मनी ने नीदरलैंड्स को 2-1 से, 1978 में अर्जेंटीना ने नीदरलैंड्स को 3-1 से और 1982 में इटली ने वेस्ट जर्मनी को 3-1 से मात दी। अर्जेंटीना ने 1986 में वेस्ट जर्मनी को 3-2 से हराकर अपना दबदबा बनाया, पर वेस्ट जर्मनी ने ठीक अगले वर्ल्ड कप 1990 में अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर इसका बदला ले लिया। 1994 का फाइनल बेहद कड़ा रहा जहां ब्राजील ने इटली को पेनल्टी शूटआउट में 3-2 (रेगुलर टाइम 0-0) से हराया। इसके बाद 1998 में फ्रांस ने ब्राजील को 3-0 से एकतरफा शिकस्त दी। 2002 में ब्राजील ने जर्मनी को 2-0 से हराकर फिर से ट्रॉफी उठाई, जबकि 2006 का फाइनल पेनल्टी शूटआउट में गया जहां इटली ने फ्रांस को 5-3 (रेगुलर टाइम 0-0) से परास्त किया।
नीदरलैंड्स को स्पेन ने 2010 में 1 गोल से हराया
आधुनिक दौर की बात करें तो स्पेन ने पहली बार 2010 में नीदरलैंड्स को 1-0 से हराकर कप जीता था। इसके बाद 2014 में जर्मनी ने अर्जेंटीना को 1-0 से हराया, 2018 में फ्रांस ने क्रोएशिया को 4-2 से मात दी और 2022 के बेहद रोमांचक फाइनल में अर्जेंटीना ने फ्रांस को पेनल्टी शूटआउट में 4-2 (रेगुलर टाइम 3-3) से हराकर खिताबी सूखा खत्म किया था। अब 2026 के इस ताजा फाइनल में स्पेन ने अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर फुटबॉल की दुनिया में एक नया इतिहास लिख दिया है।