स्टैंड-अप शो में मृत शरीरों पर टिप्पणी करना मेडिकल छात्रा को पड़ा भारी, केईएम हॉस्पिटल ने बैठाई जांच

स्टैंड-अप शो में मृत शरीरों पर टिप्पणी करना मेडिकल छात्रा को पड़ा भारी, केईएम हॉस्पिटल ने बैठाई जांच

मुंबई। एक स्टैंड-अप कॉमेडी शो में की गई विवादित टिप्पणी अब कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई के चक्रव्यूह में बदल चुकी है। मुंबई के किंग एडवर्ड मेमोरियल (केईएम) हॉस्पिटल की एमबीबीएस छात्रा सेजल पवार पर मेडिकल पढ़ाई के लिए उपयोग होने वाले पुरुष शवों (कैडेवर) को लेकर बेहद आपत्तिजनक और अमर्यादित बातें कहने का आरोप लगा है। इस मामले के तूल पकड़ने के बाद हॉस्पिटल प्रशासन ने छात्रा के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए विभागीय जांच शुरू कर दी है। हालांकि सेजल ने इस पूरे प्रकरण पर लिखित तौर पर माफी मांग ली है, लेकिन विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है।
इस बीच कानून का डंडा भी इस मामले से जुड़े लोगों पर चला है। महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए कॉमेडियन प्रणीत मोरे, हिमांशु जांगड़ा, छात्रा सेजल पवार और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो को लेकर FIR दर्ज कर ली है। इस घटनाक्रम के बाद से ही चिकित्सा जगत से जुड़े लोगों की छवि को ठेस पहुंचने और मृत शरीरों की गरिमा को तार-तार करने का गंभीर मुद्दा खड़ा हो गया है, जिसे लेकर आम लोगों में भी भारी आक्रोश है।

कॉलेज प्रशासन की सख्त कार्रवाई, जांच समिति का गठन
कॉमेडी शो के मंच से की गई इन टिप्पणियों को पूरी तरह गलत और अनैतिक ठहराते हुए हॉस्पिटल मैनेजमेंट ने तुरंत एक्शन लिया है। सेठ गोर्धनदास सुंदरदास मेडिकल कॉलेज और केईएम हॉस्पिटल के डीन डॉ हरीश पाठक ने मामले की संवेदनशीलता को रेखांकित करते हुए साफ किया कि ऐसी अमर्यादित बातें चिकित्सा क्षेत्र में किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जा सकतीं। उन्होंने कहा कि चिकित्सा विज्ञान के विद्यार्थी उन मृत शरीरों की बदौलत ही डॉक्टर बनते हैं, जिनके अंगों को उनके परिवारों द्वारा महान वैज्ञानिक उद्देश्यों के लिए दान किया जाता है। ऐसे में मृतकों के प्रति संवेदनशीलता सर्वोपरि है। प्रशासन ने इस पूरे मामले की तह तक जाने के लिए दो सीनियर मेंबर्स की एक विशेष जांच कमेटी का गठन किया है, जिसकी रिपोर्ट आने के बाद आगे की दंडात्मक कार्रवाई तय की जाएगी।

वायरल क्लिप की आपत्तिजनक बातें और जनता का गुस्सा
इंटरनेट पर तेजी से प्रसारित हो रहे प्रणीत मोरे के शो के एक हिस्से में, छात्रा सेजल पवार को एनाटॉमी क्लास में इस्तेमाल होने वाले शवों का जिक्र करते हुए सुना जा सकता है। वीडियो में वह पहले शरीर के अंगों को काटने की प्रक्रिया के बारे में बताती हैं और फिर मृत पुरुष मरीजों के गुप्तांगों को लेकर बेहद अमर्यादित टिप्पणी करती हैं।
विवाद सिर्फ यहीं खत्म नहीं हुआ, बल्कि इसी शो के एक दूसरे हिस्से ने भी लोगों को हिलाकर रख दिया। हिमांशु जांगड़ा नाम के एक व्यक्ति ने शो के दौरान अपनी डेटिंग का एक वाकया साझा किया। उसने कहा कि एक डेट पर बिरयानी खिलाने में ₹370 खर्च करने के बाद वह महिला से शारीरिक संबंध बनाने का हकदार हो जाता है। इस बेहद पिछड़ी और संकीर्ण सोच वाली बात पर वहां मौजूद मुख्य कॉमेडियन और दर्शक ठहाके लगाते दिखे। वीडियो के सामने आते ही इंटरनेट पर लोगों ने इस पर तीखी आपत्ति जताई और कहा कि ₹370 खर्च करने का मतलब किसी महिला की सहमति खरीदना नहीं होता।

विवाद बढ़ने पर सेजल और हिमांशु ने मांगी माफी
चारों तरफ से घिरने और कानूनी कार्रवाई शुरू होने के बाद हिमांशु जांगड़ा और सेजल पवार दोनों ने ही सार्वजनिक रूप से माफीनामा जारी किया है। अपने लिखित संदेश में सेजल ने स्वीकार किया कि वीडियो को दोबारा देखने पर उन्हें इस बात का गहरा अहसास हुआ है कि उनकी टिप्पणियों से समाज को कितनी ठेस पहुंची है। उन्होंने माना कि यह एक बेहद गंभीर और संवेदनशील विषय था, जहां उनके शब्दों का चयन बहुत गलत था। भले ही उनका इरादा किसी को दुख पहुंचाना नहीं था, लेकिन वह इस बात को समझती हैं कि उनके कहे शब्दों का समाज पर क्या असर हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि एक मेडिकल स्टूडेंट होने के नाते यह घटना उनके लिए आंखें खोलने वाली रही है और इससे उन्हें भविष्य में बहुत ही सोच-समझकर और जिम्मेदारी से बात करने की सीख मिली है।

मेडिकल एसोसिएशन ने उठाई सख्त कदम उठाने की मांग
इस संवेदनहीन व्यवहार के खिलाफ देश के सबसे बड़े चिकित्सा छात्र संगठनों में से एक, ऑल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AIMSA) ने मोर्चा खोल दिया है। एसोसिएशन ने देहदान करने वाले महान व्यक्तियों और मृत शरीरों के प्रति इस तरह के बर्ताव की कड़े शब्दों में भर्त्सना की है। संगठन ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि हर एक मृत शरीर उस महान इंसान का होता है जिसने समाज के कल्याण और विज्ञान की प्रगति के लिए निस्वार्थ भाव से अपना देहदान किया था। इन्हीं दाताओं के कारण ही डॉक्टरों की नई पीढ़ी मानव शरीर की संरचना को व्यावहारिक रूप से सीख पाती है, जिससे आगे चलकर लाखों लोगों की जान बचाई जा सकती है। ऐसे में इन दाताओं को समाज में सर्वोच्च सम्मान मिलना चाहिए न कि उनका उपहास उड़ाया जाए।
छात्र संगठन ने सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय से भी इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने अपील की है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर ऐसी संवेदनहीन और मेडिकल एथिक्स के खिलाफ जाने वाली सामग्री के प्रसारण पर तुरंत रोक लगाई जाए, जो इंसानी गरिमा को नुकसान पहुंचाती हो।

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