इंदौर। प्रदेश की राजनीति में इंदौर शहर एक बार फिर गरमाने लगा है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की 12 सितंबर की इंदौर यात्रा को लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने अपनी तैयारियां तेज कर दी। इस बार पार्टी ने एक रणनीति के तहत प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान डेली कॉलेज का रुख किया, ताकि वहां विद्यार्थियों के साथ राहुल गांधी की सीधी बातचीत कराई जा सके।
पूर्व छात्र बागड़िया ने लिखा प्राचार्य को पत्र
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की ओर से अधिकृत होकर वरिष्ठ अधिवक्ता और डेली कॉलेज के 1986 बैच के पूर्व छात्र अजय बागड़िया ने कॉलेज की प्राचार्य डॉ गुनमीत बिंद्रा को औपचारिक आवेदन भेजा है। इस पत्र के माध्यम से 12 सितंबर को शाम 5:30 बजे प्रस्तावित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के आयोजन के लिए परिसर का कोई उपयुक्त मैदान मांगा गया है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि कॉलेज प्रशासन चाहे तो क्रिकेट पिच क्षेत्र को सुरक्षित रखकर सिंधिया ग्राउंड दे सकता है या फिर एथलेटिक फील्ड अथवा अन्य किसी खुले स्थान का विकल्प उपलब्ध करा सकता है।
पूर्णतः शैक्षणिक बातचीत, कोई राजनीतिक प्रतीक नहीं होगा
संस्थान द्वारा अनुमति में किसी तरह की हिचकिचाहट न दिखाई जाए, इसे ध्यान में रखते हुए कांग्रेस ने यह साफ कर दिया है कि यह कोई चुनावी सभा या राजनीतिक रैली नहीं है। पत्र में स्पष्ट रूप से भरोसा दिलाया गया है कि आयोजन के दौरान किसी भी राजनीतिक दल के झंडे, बैनर या चुनाव चिह्नों का प्रयोग अथवा विज्ञापन नहीं किया जाएगा। यह केवल इंदौर के विद्यार्थियों और विपक्ष के नेता के बीच का एक विशुद्ध शैक्षणिक संवाद होगा।
संघ के आयोजन को लेकर पहले दे चुके हैं चेतावनी
इस पूरे घटनाक्रम में ध्यान देने वाली बात यह भी है कि अजय बागड़िया इससे पूर्व डेली कॉलेज में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यक्रमों को इजाजत दिए जाने पर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने प्राचार्य के साथ-साथ संघ को भी पत्र लिखकर आपत्ति दर्ज कराई थी और संतोषजनक जवाब न मिलने पर कानूनी कदम उठाने की चेतावनी दी थी।
अनुमति खारिज हुई तो बीजेपी को घेरने की रणनीति तैयार
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस ने यह कदम बेहद समझदारी के साथ उठाया है। यदि डेली कॉलेज प्रशासन राहुल गांधी के गैर-राजनीतिक छात्र संवाद को इजाजत दे देता है तो कार्यक्रम आसानी से संपन्न हो जाएगा। इसके विपरीत, यदि अनुमति खारिज की जाती है तो संघ के पिछले आयोजनों का हवाला देकर कांग्रेस के पास भारतीय जनता पार्टी और राज्य सरकार को घेरने का एक मजबूत राजनीतिक मुद्दा आ जाएगा। नेहरू स्टेडियम में पहले से ही कानूनी पेच फंसा होने के कारण कांग्रेस जानती है कि वहां मंजूरी मिलना आसान नहीं है, जिससे दोनों ही स्थितियों में पार्टी के पास सरकार के खिलाफ माहौल बनाने का अवसर उपलब्ध रहेगा।