भोजशाला में अष्टधातु की वाग्देवी कौन लाया, सूचना मिलते ही उसे हटाया गया, सुरक्षा में बड़ी खामी !

भोजशाला में अष्टधातु की वाग्देवी कौन लाया, सूचना मिलते ही उसे हटाया गया, सुरक्षा में बड़ी खामी !

इंदौर। धार की ऐतिहासिक भोजशाला इस समय देश की सबसे संवेदनशील जगहों में से एक है। हाईकोर्ट के हाल के फैसले और मुख्यमंत्री की बड़ी घोषणाओं के बाद यहां सुरक्षा की कई परतें तैनात हैं। इसके बावजूद शनिवार को जो हुआ, उसने पुरातत्व विभाग और स्थानीय प्रशासन की नींद उड़ा दी है।
कड़े पहरे के बीच कुछ अज्ञात लोग भोजशाला के गर्भगृह तक पहुंचे, वहां मां वाग्देवी की भारी-भरकम अष्टधातु की प्रतिमा स्थापित की। यही नहीं, बकायदा फूल-अक्षत चढ़ाकर विधि-विधान से पूजा भी संपन्न कर ली। पर, किसी को खबर तक नहीं लगी
हैरानी की बात यह है कि इस पूरी वारदात की भनक न तो मेटल डिटेक्टर पर तैनात सुरक्षाकर्मियों को लगी और न ही परिसर में घूम रहे गार्ड्स को। शाम करीब साढ़े 6 बजे जब एएसआई के अधिकारियों को इसका पता चला, तो पूरे महकमे में हड़कंप मच गया।

सुरक्षा में सेंधमारी की 5 बड़ी बातें
शनिवार की दोपहर ही एएसआई के अधीक्षक डॉ शिवाकांत बाजपेई ने भोजशाला पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की थी। उनके जाते ही कुछ घंटों बाद यह वारदात हो गई। परिसर के बाहर पुलिस चौकी है, विशेष सुरक्षा बल तैनात हैं और अंदर जाने के लिए मेटल डिटेक्टर से गुजरना पड़ता है। फिर भी भारी प्रतिमा अंदर कैसे पहुंच गई?

सीसीटीवी कैमरों पर सवाल
पूरा परिसर तीसरी आंख की निगरानी में है, लेकिन किसी भी कैमरे में प्रतिमा ले जाते हुए कोई संदिग्ध क्यों नहीं पकड़ा गया। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची एएसआई की टीम ने तुरंत अष्टधातु की प्रतिमा को गर्भगृह से हटाकर अपने कब्जे में ले लिया है।

भोज उत्सव समिति का किनारा
विवाद बढ़ता देख भोज उत्सव समिति के संयोजक गोपाल शर्मा ने साफ कहा कि शनिवार की घटना से उनका कोई सरोकार नहीं है, इसकी गहरी जांच होनी चाहिए। प्रशासन अब घटना के समय के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रहा है ताकि उन चेहरों की पहचान की जा सके जो सुरक्षा घेरा तोड़कर अंदर दाखिल हुए थे।

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