अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच में एक नया घटनाक्रम सामने आया है। मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह ने अपने आरोपों के समर्थन में दस्तावेज और अन्य साक्ष्य सौंप दिए हैं। चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के तीन दिन बाद मीडिया के सामने आकर तत्कालीन महासचिव चंपतराय और ट्रस्ट सदस्य डॉ अनिल मिश्र पर गंभीर आरोप लगाने वाले महिपाल सिंह ने अब जांच अधिकारियों के समक्ष कई नए दावे भी रखे हैं।
जानकारी के अनुसार, एसआईटी के अध्यक्ष 26 जुलाई को महिपाल सिंह को राम कचहरी कार्यालय से जुड़े उनके आरोपों के समर्थन में साक्ष्य उपलब्ध कराने का अवसर दिया था। यह भी कहा गया था कि आवश्यकता पड़ने पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उनका बयान भी दर्ज किया जाएगा। इससे पहले महिपाल सिंह ने 9 जून को दावा किया था कि उन्होंने वर्ष 2021 में ही चढ़ावे की राशि में गड़बड़ी का पता लगा लिया था और इसकी जानकारी संबंधित जिम्मेदार लोगों को दी थी।
चंपतराय ने उन्हें चुप रहने की सलाह दी
महिपाल सिंह ने जांच टीम को दिए अपने बयान में आरोप लगाया कि रामशंकर यादव टिन्नू के संरक्षण में बैंक कर्मचारी रत्नेश चतुर्वेदी और गगनदीप नोटों की अतिरिक्त गड्डियां लेकर जाते थे और इसी तरीके से चढ़ावे की चोरी को अंजाम दिया जाता था। उनका कहना है कि जब उन्होंने इस पूरे मामले की जानकारी तत्कालीन महासचिव चंपतराय को दी तो उन्हें चुप रहने की सलाह दी गई। इसके अगले ही दिन ट्रस्ट सदस्य डॉ अनिल मिश्र ने उन्हें लेखा संबंधी जिम्मेदारी से हटाकर उनकी जगह सुभाष श्रीवास्तव की ड्यूटी लगा दी। महिपाल सिंह ने यह भी बताया कि सुभाष श्रीवास्तव फिलहाल इस मामले में पुलिस की गिरफ्त में है।
मंदिर निर्माण वास्तु मानकों के अनुरूप नहीं
पूर्व लेखा प्रभारी ने मंदिर निर्माण की प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि ट्रस्ट ने निर्माण कार्यों की निगरानी के लिए इलेक्ट्रिकल इंजीनियर जगदीश आफले को प्रोजेक्ट इंजीनियर नियुक्त कर दिया, जबकि उन्हें सिविल इंजीनियरिंग का व्यावहारिक अनुभव नहीं था। उनके अनुसार इसी कारण मंदिर निर्माण कार्य वास्तु संबंधी मानकों के अनुरूप नहीं हो सका। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बंशी पहाड़पुर का पत्थर निशुल्क उपलब्ध होने के बावजूद ट्रस्ट ने कम गुणवत्ता वाले पत्थरों की खरीद की।
ट्रस्ट का मंदिर और विवादित संपत्ति की खरीद
महिपाल सिंह ने ट्रस्ट कार्यालय के लिए भवन चयन को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जगन्नाथ मंदिर, लवकुश मंदिर और रंगमहल मंदिर में ट्रस्ट को बिना किसी शुल्क के स्थान उपलब्ध कराया जा रहा था, लेकिन इसके बावजूद चंपतराय ने महंत शशिकांत दास को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से राम कचहरी मंदिर में ट्रस्ट का कार्यालय स्थापित कराया। इसके अलावा उन्होंने आरोप लगाया कि कई विवादित संपत्तियां ऐसे लोगों से खरीदी गईं, जिन्हें उनका वैध स्वामित्व नहीं था। बाद में इन संपत्तियों पर ट्रस्ट को कब्जा नहीं मिल सका और मामला न्यायालय तक पहुंचने से आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
मंदिर की लागत बढ़ने के पीछे भी कुछ कारण
जांच के दौरान महिपाल सिंह ने भुगतान प्रक्रिया को लेकर भी कई सवाल उठाए। उनका आरोप है कि पूर्व कैशियर वीरेंद्र वर्मा ने ऐसे लोगों के नाम पर भुगतान कराया, जिन्होंने ट्रस्ट के लिए कोई कार्य ही नहीं किया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि ट्रस्ट के गठन के समय राम मंदिर निर्माण का प्रारंभिक अनुमानित खर्च 800 करोड़ रुपये था, लेकिन बाद में कुछ विशेष लोगों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से यह राशि बढ़कर 2200 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
एसआईटी अब महिपाल सिंह द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों और आरोपों का परीक्षण कर रही है। जांच एजेंसी का कहना है कि सभी तथ्यों का परीक्षण करने के बाद ही आगे की कार्रवाई और निष्कर्ष तय किए जाएंगे।