कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को प्रहलाद पांडे ने लिखा पत्र, कहा कि भविष्य में गिरफ्तारी नहीं, संवाद का रास्ता चुनें, जेल से रिहाई के बाद जताया विरोध!

इंदौर। प्रदेश सरकार के नगरीय विकास एवं आवास और संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के निवास पर विरोध जताने पहुंचे प्रहलाद पांडे और उनकी पत्नी संगीता पांडे ने जेल से रिहा होने के बाद मंत्री को एक पत्र लिखा है। संगीता पांडे 25 जुलाई को और प्रहलाद पांडे 26 जुलाई को रिहा हुए। बाहर आने के बाद उन्हें मीडिया के जरिए कैलाश विजयवर्गीय द्वारा इंदौर के नगर पुलिस अधीक्षक को लिखे पत्र की जानकारी मिली। इस पत्र पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रहलाद पांडे ने कहा कि मंत्री द्वारा उनके शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक विरोध को कमतर आंकने की कोशिश की गई है।

जिम्मेदारी याद दिलाई, नीट लीक मुद्दे पर घेरा
प्रहलाद पांडे ने पत्र में उल्लेख किया कि संसदीय कार्य मंत्री होने के नाते कैलाश विजयवर्गीय से यह उम्मीद थी कि वे विधानसभा में नीट पेपर लीक जैसे महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा होने देंगे। लेकिन चर्चा कराने के बजाय इससे बचने की कोशिश की गई। मंत्री के इस दावे को भी खारिज किया गया कि यह मुद्दा प्रदेश से संबंधित नहीं है या आंदोलन प्रायोजित है। पांडे दंपत्ति ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध कोई भूल नहीं था, जैसा कि मंत्री के पत्र में दर्शाया गया है। उन्होंने यह कदम पूरी जिम्मेदारी और संवैधानिक अधिकारों के तहत उठाया था।

सुमित्रा महाजन से हुई मुलाकात को किया याद
पत्र में बताया गया कि मंत्री के घर जाने से पहले वे स्थानीय सांसद के निवास पर भी गए थे, ताकि जनप्रतिनिधि छात्रों और अभिभावकों की चिंताओं को सदन में उठा सकें। लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि का पहला कर्तव्य जनता की आवाज बनना है। इस दौरान वर्ष 2011 की एक घटना का भी जिक्र किया गया, जब पांडे दंपत्ति जनहित के मुद्दे पर तत्कालीन सांसद सुमित्रा महाजन ‘ताई’ से मिलने गए थे। तब ताई ने न केवल उनकी बात सुनी थी, बल्कि उनका स्वागत कर मिठाई भी खिलाई थी। पत्र में कहा गया कि मतभेद होने के बाद भी संवाद बने रहना ही लोकतंत्र की असली खूबसूरती है।

भविष्य में भी जारी रहेगा शांतिपूर्ण प्रयास
पत्र के अंत में दर्ज प्रकरण में कानून के अनुसार राहत देने का आग्रह किया गया है। साथ ही यह साफ किया गया है कि भविष्य में भी संवैधानिक दायरे में रहकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का सिलसिला जारी रहेगा। पांडे ने उम्मीद जताई कि आगे से जब भी वे किसी मुद्दे पर बात करने मंत्री निवास जाएंगे, तो उनका सामना पुलिस कार्रवाई या गिरफ्तारी से नहीं, बल्कि एक स्वस्थ संवाद से होगा।

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