भोपाल। विजयपुर के बाद दतिया उपचुनाव में मिली सफलता ने मध्य प्रदेश कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और नेताओं में नया जोश भर दिया है। लंबे समय से लगातार पराजय का सामना कर रही पार्टी अब इस माहौल को अपने पक्ष में मोड़ने में जुट गई है। इसी कड़ी में कांग्रेस ने 11 अगस्त को भोपाल में अपनी राजनीतिक मामलों की समिति (पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी) की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2028 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए एक ठोस और विस्तृत रोडमैप तैयार करना है।
दतिया चुनाव में कांग्रेस ने पहली बार बूथ स्तर पर प्रबंधन के लिए ‘क्लस्टर-सेक्टर मॉडल’ को आजमाया था, जिसे मिली सफलता के बाद अब पूरे राज्य की सभी 230 विधानसभा सीटों पर लागू करने पर विचार किया जा रहा है। 11 अगस्त की इस उच्चस्तरीय बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ, दिग्विजय सिंह और राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा सहित संगठन के तमाम बड़े पदाधिकारी और दिग्गज नेता भाग लेंगे।
2018 के फॉर्मूले से मिलेगी प्रेरणा
कांग्रेस नेतृत्व की नजरें वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव जैसे प्रदर्शन को दोहराने पर हैं। उस दौरान पार्टी ने आपसी तालमेल और जमीनी रणनीति के दम पर 15 साल बाद वापसी करते हुए 114 सीटें हासिल की थीं और राज्य में सबसे बड़े दल के रूप में उभरी थी। तब भाजपा 109 सीटों पर सिमट गई थी। उस समय भाजपा को 41% वोट मिले थे, जो कांग्रेस के 40.9% वोट शेयर से थोड़ा अधिक थे, फिर भी मजबूत बूथ मैनेजमेंट और संगठन की एकजुटता के कारण कांग्रेस ने बाजी मार ली थी। उस चुनाव में तत्कालीन प्रदेश प्रभारी दीपक बाबरिया के प्रबंधन और सत्ता विरोधी लहर (एंटी-इंकमबेंसी) का फायदा उठाने की रणनीति की बड़ी भूमिका मानी गई थी।
सड़क से विधानसभा तक घेरने का प्लान
हाल के दो उपचुनाव जीतकर उत्साह से लबरेज़ कार्यकर्ता अब राज्य में बदलाव के संकेत देख रहे हैं। पार्टी अब केवल चुनावी मशीन बनने के बजाय जनता की समस्याओं के लिए संघर्ष करने वाले एक जिम्मेदार विपक्ष के रूप में खुद को स्थापित करना चाहती है। इसके लिए आने वाले दिनों में किसानों के हक, बेरोजगारी, स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार और बिगड़ती कानून-व्यवस्था जैसे ज्वलंत मुद्दों पर राज्यव्यापी बड़े आंदोलन छेड़ने की तैयारी है।
बैठक के एजेंडे पर अपनी बात रखते हुए राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा ने बताया कि 11 अगस्त को भोपाल में आयोजित होने वाली पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी की बैठक में वे स्वयं भी शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि इस बैठक का मकसद वर्ष 2028 के लिए ऐसा रोडमैप तैयार करना है जिससे कांग्रेस एक बार फिर मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरे, क्योंकि प्रदेश की जनता अब बदलाव के साफ संकेत दे रही है।