उद्धव गुट को झटका, 6 सांसद शिंदे की शिवसेना में शामिल, दो-तिहाई संख्या जुटाकर दल-बदल कानून से बचे बागी !

मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में सोमवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। कई दिनों से चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले शिवसेना (यूबीटी) गुट के 9 में से 6 लोकसभा सांसद मुख्यमंत्री रह चुके और वर्तमान उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए। मुंबई में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिंदे ने इन सांसदों का स्वागत करते हुए कहा कि अब 6 टाइगर उनके साथ आ गए हैं और वे असली शिवसेना परिवार का हिस्सा बन चुके हैं। शिंदे गुट में शामिल होने वाले सांसदों में धाराशिव से ओमराजे निंबालकर, मुंबई उत्तर-पूर्व से संजय दीना पाटिल, परभणी से संजय जाधव, यवतमाल-वाशिम से संजय देशमुख, हिंगोली से नागेश पाटिल अष्टिकर और शिर्डी से भाऊसाहेब वाकचौरे शामिल हैं। इस मौके पर एकनाथ शिंदे ने कहा कि शिवसेना और उसके चुनाव चिन्ह ‘धनुष-बाण’ को बचाने के लिए पहले चरण में बगावत की गई थी। उन्होंने कहा कि अब उस प्रक्रिया का दूसरा चरण शुरू हो गया है। शिंदे ने दावा किया कि पार्टी की मूल विचारधारा को आगे बढ़ाने के लिए यह कदम महत्वपूर्ण है।

दो-तिहाई सदस्यों का समर्थन
राजनीतिक दृष्टि से यह घटनाक्रम इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि दल-बदल विरोधी कानून के तहत किसी संसदीय दल में विभाजन की स्थिति में कम से कम दो-तिहाई सदस्यों का समर्थन आवश्यक होता है। लोकसभा में उद्धव ठाकरे गुट के कुल 9 सांसद हैं और उनमें से 6 सांसदों के शिंदे गुट में आने से यह संख्या पूरी हो गई है। ऐसे में इन सांसदों पर अयोग्यता की कार्रवाई का खतरा नहीं रहेगा और वे लोकसभा की सदस्यता बनाए रख सकेंगे।

अटकलें सही निकली
इस घटनाक्रम से पहले दिल्ली में उद्धव ठाकरे गुट ने अपने संसदीय दल की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई थी। हालांकि बैठक में 9 में से केवल 3 सांसद ही पहुंचे। इसके बाद से ही राजनीतिक हलकों में बड़े बदलाव की चर्चाएं तेज हो गई थीं। सोमवार को 6 सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने के साथ ही इन अटकलों पर मुहर लग गई। महाराष्ट्र की राजनीति में इस घटनाक्रम को उद्धव ठाकरे गुट के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, जबकि शिंदे खेमे ने इसे अपनी राजनीतिक ताकत में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी के रूप में पेश किया है।

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