इंदौर में रातभर रुका बांग्लादेशी वायुसेना का विमान, 14 घंटे बाद वाराणसी रवाना, मस्कट से कराची होकर भारत पहुंचा!

इंदौर। यहां के देवी अहिल्याबाई होलकर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर बांग्लादेश वायुसेना के एक विमान की आवाजाही और लंबे समय तक रुकने को लेकर हलचल बनी हुई है। यह सैन्य विमान मस्कट से उड़ान भरकर कराची के रास्ते 28 जुलाई की शाम 5:24 बजे इंदौर उतरा था। इसके बाद अगले दिन यानी 29 जुलाई की सुबह लगभग 8:00 बजे विमान ने यहां से उड़ान भरी और वाराणसी होते हुए ढाका के लिए आगे बढ़ गया। करीब 14 घंटे 36 मिनट तक चले इस लंबे हॉल्ट ने स्थानीय स्तर पर कई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

ईंधन भराई और प्रक्रियात्मक औपचारिकताएं हुई पूरी
विमान के जमीन पर उतरते ही इंदौर एयरपोर्ट पर सुरक्षा इंतजामों से जुड़ी एजेंसियां सतर्क हो गईं। रातभर रुकने के दौरान विमान में ईंधन भरने (री-फ्यूलिंग) के साथ-साथ ग्राउंड हैंडलिंग से जुड़ी तकनीकी और जरूरी औपचारिकताएं पूरी की गईं। हालांकि, विमान में क्रू मेंबर के अलावा कौन-कौन मौजूद था और इस सफर की मुख्य वजह क्या थी, इसे लेकर स्थानीय अधिकारियों की ओर से कोई अधिकृत ब्योरा सामने नहीं आया है।

केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ही लैंडिंग
नियमों के मुताबिक, किसी भी विदेशी सैन्य या नागरिक विमान को भारतीय सीमा के भीतर लैंड करने से पहले विदेश मंत्रालय, नागरिक उड्डयन मंत्रालय और संबंधित केंद्रीय एजेंसियों से बाकायदा अनुमति लेनी होती है। इंदौर एयरपोर्ट प्रबंधन के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम में भी तय व्यवस्था का पालन किया गया और सरकार से हरी झंडी मिलने के बाद ही विमान को इंदौर में उतरने, री-फ्यूलिंग और अन्य बुनियादी सुविधाएं दी गईं।

इस विमान के रुकने को लेकर एयरपोर्ट प्रबंधन चुप
तकनीकी काम और री-फ्यूलिंग में आमतौर पर कम समय लगता है। लेकिन, विमान के 14 घंटे 36 मिनट तक इंदौर में खड़े रहने को लेकर तरह-तरह की आशंकाएं और सवाल उठ रहे हैं। दूसरी ओर, स्थानीय एयरपोर्ट प्रशासन ने इस मामले में पूरी तरह दूरी बना रखी है। अधिकारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय या सैन्य संचालन की विस्तृत जानकारी केंद्रीय स्तर की एजेंसियां ही देती हैं और स्थानीय प्रबंधन की जिम्मेदारी केवल निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत जरूरी व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने तक सीमित रहती है।

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