अयोध्या। राम मंदिर ट्रस्ट के एक रसूखदार कर्मचारी के घर छापेमारी में भारी मात्रा में सोना बरामद हुआ है, जिसके बाद मंदिर परिसर में हड़कंप मच गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की जांच टीम ने पुलिस के साथ मिलकर शनिवार को रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के घर पर बेहद गोपनीय तरीके से यह कार्रवाई की। हालांकि अधिकारिक तौर पर सोने की सटीक मात्रा की पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों का दावा है कि बरामद सोने की कीमत करोड़ों रुपए में है। इस पूरे मामले पर ट्रस्ट और पुलिस प्रशासन के आला अधिकारी फिलहाल कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी ने मामले की जांच एसआईटी को सौंपी है।
रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू को ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का बेहद करीबी माना जाता है। मंदिर प्रबंधन में टिन्नू का अच्छा-खासा दबदबा रहा है, जो सुरक्षा व्यवस्था से लेकर दान में आने वाली रकम को बैंक में जमा कराने तक का पूरा काम संभालता था। इस मामले में केवल टिन्नू ही नहीं, बल्कि मंदिर निर्माण प्रभारी गोपाल राव के रिश्तेदार सोमेश आनंद पर भी गंभीर आरोप लगे हैं। जांच में सामने आया है कि सोमेश ने बीते 1 साल में कर्नाटक सहित विभिन्न राज्यों की 50 से अधिक यात्राएं कीं।
सोमेश की कार्यप्रणाली बेहद संदिग्ध थी, वह अयोध्या से भारी बोरे लेकर ट्रेन के जरिए रवाना होते थे और वापसी में हवाई जहाज से खाली हाथ लौट आते थे। कयास लगाए जा रहे हैं कि सुरक्षा जांच से बचने के लिए ट्रेन का सहारा लिया जाता था, ताकि दान का कीमती सामान और नकदी आसानी से बाहर भेजी जा सके। सोमेश को वर्ष 2023 में गोपाल राव के निर्माण प्रभारी बनने के बाद मंदिर में नौकरी मिली थी। अब इस पूरे घपले की गहराई से तफ्तीश करने के लिए 3 सदस्यीय एसआईटी की टीम सोमवार दोपहर राम मंदिर पहुंच चुकी है।
ऑटो चालक से 50 करोड़ की संपत्ति का मालिक बना कर्मचारी
जांच के दौरान रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू की अयोध्या और लखनऊ में करीब 50 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्ति का पता चला है। वर्ष 1992 में अयोध्या की सड़कों पर ऑटो चलाने वाले टिन्नू की माली हालत में अचानक आए इस उछाल ने सबको चौंका दिया है। स्वर्गद्वार इलाके में स्थित उसके पुश्तैनी मकान पर जब 6 सदस्यों की टीम ने छापा मारा, तो वहां से भारी मात्रा में सोना हाथ लगा। इसके अतिरिक्त अयोध्या एयरपोर्ट के पास उसके एक 70 कमरों वाले हॉस्टल की बात भी सामने आई है, जहां जल्द ही तलाशी ली जा सकती है। वर्तमान में टिन्नू को पीसीएफ यात्री सुविधा केंद्र में रोककर पूछताछ की जा रही है।
इसी क्रम में दान के सोने-चांदी की जिम्मेदारी संभालने वाले कर्मचारी केडी तिवारी के आवास पर भी छापा मारा गया है। केडी तिवारी द्वारा हाल ही में खरीदी गई 1.5 करोड़ रुपए की जमीन भी जांच के दायरे में है। हालांकि तिवारी का कहना है कि उनका काम केवल आभूषणों को तौलकर रसीद देना और उसे आगे बढ़ाना था, उसके बाद उन आभूषणों का क्या होता था, इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है।
दानपात्र से पहले गायब होते थे जेवर, फिर कैश पर भी साफ होने लगा हाथ
सूत्रों के मुताबिक, रामलला के चढ़ावे से चोरी की गई रकम का बंटवारा निर्मला हॉस्पिटल के पास एक गुप्त स्थान पर होता था। टिन्नू और सोमेश आनंद का मंदिर में इतना प्रभाव था कि उनके काम में कोई दखल नहीं देता था। इस गिरोह के तार मंदिर के दान लेखा प्रभारी हरीश श्रीवास्तव और वहां तैनात किए गए कुछ सेवानिवृत्त शिक्षकों से भी जुड़ रहे हैं, जिन पर अब नजर रखी जा रही है। मंदिर में रोजाना लगभग 1 लाख श्रद्धालु आते हैं, जिससे चढ़ावे की रकम बहुत बड़ी होती है।
हैरानी की बात यह है कि 2 साल पहले सावन के झूला मेले के दौरान रामलला और उनके भाइयों के चार सोने के मुकुट भी गायब हो गए थे। पुजारियों के बार-बार दबाव बनाने के बाद ये मुकुट ट्रस्ट के ही एक पदाधिकारी की अलमारी से बरामद हुए थे। यह मुकुट गाजियाबाद के एक भक्त ने अपनी मां के गहने बेचकर दान किए थे। मंदिर में आने वाले श्रद्धालु अक्सर दानपात्र में ही सोने-चांदी के जेवर डाल देते थे। इस व्यवस्था का फायदा उठाकर सिर्फ नकदी का हिसाब रखा जाता था और धातुओं की एंट्री नहीं की जाती थी। इसी कमजोरी का फायदा उठाकर पहले कीमती आभूषणों की चोरी की गई और बाद में भारी मात्रा में कैश भी गायब किया जाने लगा।
चार अन्य चेहरों पर भी टिकी है एसआईटी की नजर
इस पूरे घालमेल में टिन्नू यादव ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर अपने भतीजे मनीष यादव को भी पीसीएफ यात्री सुविधा केंद्र में नौकरी पर लगवाया था। सूत्रों के अनुसार, मनीष की निशानदेही पर 36 लाख रुपए की नकदी बरामद की जा चुकी है। इनके अलावा, नोटों की गिनती करने वाले कर्मचारियों में शामिल राजेश पाठक भी संदेह के घेरे में हैं। पिछले 5-6 वर्षों में राजेश के रहन-सहन और जीवनशैली में आए अचानक बदलाव को लेकर उनसे कड़ी पूछताछ की जा रही है। वहीं, नोटों की गिनती के काम में लगे दो अन्य कर्मचारी लवकुश और उसका जीजा अनुकल्प मिश्रा भी एसआईटी के रडार पर हैं। इन दोनों की आर्थिक स्थिति में भी बेहद कम समय में अप्रत्याशित रूप से भारी उछाल देखा गया है, जिसकी बारीकी से जांच की जा रही है।