मुंबई। हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना के बांद्रा स्थित ऐतिहासिक बंगले ‘आशीर्वाद’ को लेकर बंबई हाई कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने इस प्रसिद्ध बंगले को ‘शापित’, ‘भुतहा’ या ‘मनहूस’ बताने वाले विज्ञापनों, खबरों और ऑनलाइन पोस्ट पर अंतरिम रोक लगा दी है। हाई कोर्ट ने सभी मीडिया संस्थानों और इंटरनेट मंचों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे इस संपत्ति के संबंध में ऐसी किसी भी भ्रामक सामग्री का प्रकाशन या प्रसारण तुरंत बंद करें।
अदालत ने अपने फैसले में माना कि किसी संपत्ति को बिना किसी आधार के ‘हॉन्टेड’ या ‘अशुभ’ कहना प्रथम दृष्टया मानहानि का मामला बनता है। इससे न केवल संपत्ति की छवि खराब होती है, बल्कि वहां रहने वाले वर्तमान मालिक के सम्मानपूर्वक और शांतिपूर्ण जीवन जीने के मौलिक अधिकार का भी हनन होता है।
राजेंद्र कुमार से शशि शेट्टी तक का सफर
मुंबई में बांद्रा के कार्टर रोड पर स्थित यह बंगला दशकों से चर्चा में रहा है। शुरुआत में इसके मालिक मशहूर अभिनेता राजेंद्र कुमार थे और उन्होंने इसका नाम ‘डिंपल’ रखा था। बाद में सुपरस्टार राजेश खन्ना ने इस बंगले को खरीदा और इसका नाम बदलकर ‘आशीर्वाद’ कर दिया। राजेश खन्ना के निधन के बाद इस संपत्ति को जाने-माने कारोबारी शशि शेट्टी ने खरीद लिया था।
कारोबारी शशि शेट्टी ने बंबई हाई कोर्ट में याचिका दायर कर बताया कि इंटरनेट पर कई ऐसे आर्टिकल्स, ब्लॉग्स और वीडियोस लगातार चल रहे हैं, जिनमें उनके घर को अपशकुनी और भुतहा बताया जा रहा है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील बीरेंद्र सराफ ने अदालत के सामने स्पष्ट किया कि पुराना बंगला अब ढहाया जा चुका है और उसकी जगह एक नया मकान बन गया है। हालांकि, राजेश खन्ना की यादों से जुड़ा ‘आशीर्वाद’ नाम आज भी बरकरार रखा गया है। याचिका में एक चर्चित वेबसाइट के लेख ‘19 रियल हॉन्टेड हाउसेस इन इंडिया दैट विल गिव यू ए कोल्ड स्वीट’ का भी उल्लेख किया गया, जिसमें इस बंगले को भारत के सबसे डरावने या भुतहा घरों की लिस्ट में शामिल किया गया था।
सनसनी फैलाने वाली सामग्री पर कोर्ट की टिप्पणी
मामले पर सुनवाई करते हुए जस्टिस आरिफ एस डॉक्टर ने 24 जुलाई को अपना अंतरिम आदेश जारी किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए मकान मालिक द्वारा राहत की मांग करना पूरी तरह जायज है। जज ने टिप्पणी की कि इस प्रकार की निराधार और सनसनीखेज खबरों से याचिकाकर्ता को बिना किसी वजह के परेशानी उठानी पड़ रही है। अदालत ने यह भी ध्यान दिया कि मामले में किसी भी प्रतिवादी या प्रकाशक ने हाजिर होकर अपनी प्रकाशित सामग्री के पक्ष में कोई ठोस तर्क प्रस्तुत नहीं किया। हाई कोर्ट का यह अंतरिम आदेश अगली सुनवाई तक लागू रहेगा। अदालत इस मामले पर अगली सुनवाई 21 अगस्त, 2026 को करेगी।