नई दिल्ली। मेघालय के चर्चित हनीमून मर्डर केस में आरोपी सोनम रघुवंशी ने सुप्रीम कोर्ट में जवाबी हलफनामा दाखिल कर खुद को बेगुनाह बताया है। सोनम ने अदालत से कहा है कि उसे इस मामले में झूठा फंसाया गया है और उसके खिलाफ अभियोजन का पूरा मामला केवल परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है। ऐसे में केवल आरोपों के आधार पर उसे दोषी नहीं माना जा सकता। इस मामले में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। वहीं, मेघालय सरकार ने उसकी जमानत रद्द करने की मांग की है।
ट्रायल में सहयोग करने का दावा
अपने जवाबी हलफनामे में सोनम ने कहा कि वह ट्रायल की पूरी प्रक्रिया में लगातार सहयोग कर रही है। उसका कहना है कि यदि मुकदमे की सुनवाई में किसी प्रकार की देरी हुई है तो उसके लिए उसे जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। उसने अदालत को बताया कि जांच से लेकर न्यायिक प्रक्रिया तक उसने हर स्तर पर सहयोग किया है और अदालत द्वारा निर्धारित सभी शर्तों का पालन किया है।
जमानत रद्द करने का विरोध
सोनम ने अदालत को बताया कि उसे 27 अप्रैल 2026 को जमानत मिली थी और 28 अप्रैल 2026 को वह जेल से रिहा हो गई थी। उसके अनुसार, अब उसे दोबारा जेल भेजने का कोई औचित्य नहीं बनता। हलफनामे में कहा गया है कि जमानत निरस्त करने के लिए जिन कानूनी आधारों की आवश्यकता होती है, वे इस मामले में मौजूद नहीं हैं। उसने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने यह आरोप भी नहीं लगाया है कि उसने जमानत की किसी शर्त का उल्लंघन किया है।
हलफनामे में सोनम ने कहा है कि मामले में उससे अब कोई बरामदगी शेष नहीं है और पुलिस चार्जशीट भी दाखिल कर चुकी है। ऐसे में साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका नहीं है। उसने यह भी बताया कि वह फिलहाल जमानत की शर्तों के अनुसार शिलांग में रह रही है।
परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर उठाए सवाल
अपने बचाव में सोनम ने कहा कि अभियोजन का पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है। ऐसे मामलों में आरोपों को संदेह से परे साबित करना अभियोजन की जिम्मेदारी होती है। उसने अदालत से कहा कि जब तक आरोप विधिक रूप से सिद्ध नहीं हो जाते, तब तक केवल आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
पहले भी अदालत कर चुकी है टिप्पणी
इस मामले में इससे पहले सुप्रीम कोर्ट यह टिप्पणी कर चुका है कि चूंकि आरोपी जमानत पर बाहर है, इसलिए फिलहाल जमानत रद्द करने के पक्ष में अदालत नहीं है। हालांकि, अदालत ने सोनम को नोटिस जारी कर उसका पक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। अब दाखिल किए गए जवाबी हलफनामे में सोनम ने अपने पक्ष में विस्तृत दलीलें रखते हुए जमानत बरकरार रखने की मांग की है।